स्मार्ट सिटी के लिए पालिका की ओर जो कार्ययोजना तैयार की गई है उसके अनुसार नगर क्षेत्र में सफाई की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। खुले में शौच की प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने के लिए योजना बनाई गई है। वैसे पालिका ने नगर क्षेत्र में जो सर्वे किया है उसके अनुसार 95 फीसदी लोगों के पास अपने शौचालय हैं। पांच फीसदी वह लोग हैं जो मजदूरी करते हैं। बिना शौचालय वाले आवासों में निवास करते हैं। ऐसे लोगों के लिए सार्वजनिक शौचालयों की संख्या बढ़ा दी जाएगी। हर इलाके में एक एक सार्वजनिक शौचालय होगा ताकि खुले में शौच कोई न करे।
इस कार्ययोजना में यह भी शामिल किया गया है कि परिवारों और समुदायों के लिए शौचालयों का निर्माण कराया जाए। सिर पर मैला ढोने की प्रथा हालांकि यहां पर नहीं है। यदि कहीं पर वह बची है तो उसे जड़ से समाप्त किया जाएगा। पालिका ने आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से अपशिष्ट प्रबंधन का भी फैसला लिया है। स्मार्ट सिटी में जैविक और अजैविक कूड़े का तत्काल निस्तारण होगा।
स्वच्छता के प्रति लोगों का व्यवहार बदलने, नगर क्षेत्र में हर मकान के पास छोटे छोटे पौधों का रोपण करने का भी प्रयास होगा ताकि नगर में हरियाली को कायम रखा जा सके और पर्यावरण प्रदूषण की चुनौतियों से निपटा जा सके। पालिका के अधिशासी अधिकारी खीमानंद जोशी ने बताया कि कार्ययोजना का ड्राफ्ट तैयार कर जिलाधिकारी को सौंपा जा रहा है। वह कहते हैं कि स्वच्छ भारत अभियान की चुनौतियों, व्यवहार, पहल और अनुभवों को लोगों के बीच साझा किया जाएगा। स्कूल, कालेज, स्वयंसेवी संस्थाओं और समुदाय के माध्यम से अभियान चलाए जाएंगे।