धारचूला में गाला के पास बहने वाले नाले के आसपास पटी बर्फ
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जिले में बुधवार को शीतलहर का जबर्दस्त प्रकोप बना रहा। सुबह बादलों की आवाजाही और दिनभर तेज हवाओं का असर बना रहने से तापमान में भारी गिरावट आ गई। जिला मुख्यालय में बुधवार का न्यूनतम तापमान 1.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि अधिकतम तापमान 13 डिग्री से ऊपर नहीं जा पाया। अपरान्ह तीन बजे मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। करीब दस मिनट तक बौछारें गिरने से तापमान में और ज्यादा गिरावट आ गई। ठंड के कारण लोग घरों में दुबके रहे। शाम तक यहां तेज हवा का असर बना रहा। मुनस्यारी में न्यूनतम तापमान माइनस 0.3 डिग्री पहुंच गया है। मुनस्यारी के पास पंचाचूली, हंसलिंग, राजरंभा में बुधवार सुबह फिर से हिमपात हुआ। मल्ला जोहार के सभी गांव बर्फ से अलग-थलग पड़े हुए हैं। इन गांवों से तहसील मुख्यालय पहुंचना कठिन हो रहा है।
उधर, धारचूला तहसील में ऊंचाई वाले सभी इलाके बर्फ से पटे हैं। बूंदी से आगे जाने में लोगों को भारी कठिनाई हो रही है। पैदल रास्ते और खेत सभी बर्फ से पट गए हैं। इन इलाकों में आसमान पर हल्के बादल लगते ही हिमपात शुरू हो रहा है। कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर नारायणआश्रम से लेकर लिपुलेख तक भारी हिमपात हुआ है। मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि 16 जनवरी के बाद एक बार फिर से बारिश और हिमपात की संभावना बन रही है। कम से कम इस महीने लोगों को ठंड से कोई राहत मिलने वाली नहीं है।
वहीं, सात जनवरी को हुई अच्छी बारिश के बाद किसानों ने खेतीबाड़ी का काम तेज कर दिया है। बारिश से गेहूं और मसूर की फसल अच्छी होने की उम्मीद जताई जा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. आरके सिंह ने कहा कि शीतकालीन बारिश यदि कम मात्रा में हो तो भी जमीन में नमी का असर लंबे समय तक रहता है।