पिथौरागढ़ । मानसखंड माला मिशन के तहत चयनित प्रसिद्ध पाताल भुवनेश्वर में इस बार दर्शकों की संख्या कम रही। दो साल पूर्व गुफा के दर्शन के लिए करीब 95000 यात्री पहुंचे थे। इस बार यह संख्या लगभग 70000 रही।
मिशन के तहत पाताल भुवनेश्वर को सरकार आध्यात्मिक पर्यटन के लिए विकसित कर रही है। इसके लिए 239 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। गुफा के आसपास यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां कार्य किए जाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की अनुमति आवश्यक है। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष नीलम भंडारी ने बताया कि ऑक्सीजन की कमी के चलते अगस्त से अक्तूबर तक गुफा के दर्शन बंद रहते हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए चार छोटे और चार बड़े ऑक्सीजन सिलेंडर रखे गए हैं। ऑक्सीजन कॉन्सट्रेटर मशीन भी रखी गई है। तीन सीसीटीवी अंदर और दो बाहर लगाए गए हैं।
प्रशासन के साथ ऑक्सीजन प्लांट लगाने की बात हुई थी लेकिन अभी इस दिशा में कोई एक्शन नहीं लिया गया है। उन्होंने बताया कि जन प्रतिनिधियों के माध्यम से प्लांट लगाने का मामला मुख्यमंत्री के समक्ष भी रखा गया है। विगत दिनों डीएम आशीष भटगांई ने भी पाताल भुवनेश्वर पहुंच संरचनात्मक और संरक्षण संबंधी कार्यों को एएसआई के साथ समन्वय कर समयबद्ध और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरे करने के आदेश दिए थे।
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मंदिर समिति को होती है 2.50 लाख की आय
पाताल भुवनेश्वर मंदिर समिति को यात्रियों के दर्शन से सालाना दो से ढाई लाख रुपये की आय होती है। समिति के अध्यक्ष नीलम भंडारी ने बताया कि अगस्त से अक्तूबर तक गुफा बंद रहने से नुकसान होता है। आदि कैलाश यात्रा भी इस समय चरम पर होती है लेकिन ऑक्सीजन की कमी के चलते यात्री गुफा के दर्शन नहीं कर पाते हैं। संवाद
कोट:
पाताल भुवनेश्वर में कार्यों की अनुमति के लिए एएसआई से पत्राचार किया गया है। वहां से अनुमति मिलते ही पर्यटन सुविधाओं के कार्यों में तेजी आएगी। - कीर्ति चंद्र आर्य, जिला पर्यटन अधिकारी