प्रकृति के कोप के पीछे मानव की खुद की गलतियां भी प्रमुख कारण हैं। पहाड़ पर अवैध खनन, सड़कों के निर्माण के दौरान पहाड़ी से पत्थर निकालने की होड़ भी आपदा का कारण बन रही है। सरकारी तंत्र की लापरवाही से जिला मुख्यालय के नाघर, कुम्डार, पाभें, कनारी बड़ी आपदा की दहलीज पर बैठे हैं। अवैध खनन करने वालों ने हरीभरी पहाड़ियों को खोखला कर डाला है।
पिछले हफ्ते अमर उजाला ने पिथौरागढ़ के प्रमुख पैराग्लाइडिंग स्थल को अवैध खनन से हो रहे नुकसान का मामला प्रमुखता से उठाया। कनारी, पाभें की पहाड़ी को अवैध खनन के माफिया ने उधेड़ कर रख दिया है। अवैध खनन में ट्रैक्टर से लेकर जेसीबी तक का प्रयोग किया जा रहा है। ट्रैक्टर का प्रयोग कंप्रेशर मशीन चलाने के लिए किया जाता है, जिससे पहाड़ी लगातार दरक रही है। अवैध खनन से पाभें गांव पूरी तरह आपदा की जद में आ गया है।
कनारी, पाभें जाने वाली सड़क के किनारे से तक पत्थर, बजरी निकाली जा रही है। सड़क किनारे खुलेआम हो रहे खनन से देवत, कुम्डार, नाघर गांवों की जमीन मलबे से पट गई है। कभी भी इन गांवों में आपदा की मार पड़ सकती है। वहीं, अमर उजाला के मुहिम एवं ग्रामीणों के हालिया विरोध के बाद डीएम एचसी सेमवाल ने एसडीएम और तहसीलदार को पैराग्लाइडिंग स्थल के आसपास हो रहे अवैध खनन की जांच सौंपी थी, लेकिन एक हफ्ता बीतने के बाद भी ये अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे हैं।
वृक्षविहीन पहाड़ियां बन रही भूस्खलन का कारण
आज जिले का बस्तड़ी क्षेत्र आपदा का दंश झेल रहा है। बस्तड़ी हो या उससे दो किमी नीचे पत्थरकोट गांव दोनों की पीछे की पहाड़ी वृक्षविहीन हैं। लोग पहाड़ियों पर पेड़ लगाने के स्थान पर खनन को अधिक तवज्जो देते हैं, यदि जमीन पर पेड़ हों तो भूस्खलन का खतरा काफी कम हो जाता है। भूस्खलन की जद में आए क्षेत्रों में जमीन को बांधे रखने वाले पेड़ों से आच्छादित करना होगा। पहाड़ों को खनन के लिए खोखला करने पर लगाम कसनी होगी।