पिथौरागढ़ में निकलता मां उल्का का डोला।
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हर साल चैत्र दशमी को निकलने वाले मां उल्का के डोले की भव्यता देखने लायक थी। सेरा गांव से मां का डोला निकला तो माहौल भ्ाितमय हो गया। लोग मां उल्का, माता काली, भवानी, गंगनाथ, भूमिया देवता की जयजयकार करने लगे। सोरघाटी (पिथौरागढ़) की आराध्य देवी मां उल्का के मंदिर से जुड़े इस पर्व की तैयारी दो दिन पहले से हो जाती है। गांव के लोग अष्टमी, नवमी को रतजागा करते हैं।
दशमी की सुबह ढोल नगाड़ों की थाप पर सेरा गांव में देवताओं का आह्वान किया गया। माता की ध्वजा के साथ डोल, नगाड़ों के साथ उल्का देवी मंदिर जाकर डोले को लाया गया। गांव में डोले को सजाने के साथ ही उल्का मैय्या के देवडांगर अशोक मेहता और अन्य देवताओं के डांगरों को सजाया गया। डोला सजने के बाद ढोल, नगाड़े और अन्य वाद्य यंत्रों के गूंज के बीच देवताओं का आह्वान किया।
डोले में उल्का मैय्या के डांगर अशोक मेहता, कालिका मैय्या के डांगर मंटू मेहता, भूमिया देव के डांगर कवींद्र मेहता का अवतरण हुआ। कालिका मैय्या, भूमिया देवता, गंगानाथ, भवानी मंदिर की पूजा की गई। शाम को 4 बजे माता का डोला उल्का देवी मंदिर के लिए चल पड़ा। डोले के साथ धर्मू मेहता, किशन मेहता, बंटी मेहता वीर के रूप में चल रहे थे। इस दौरान सेरा गांव से उल्का मंदिर तक माहौल भक्ति मय हो गया। उल्का देवी की परिक्रमा के बाद देव डांगर को डोली से नीचे उतारा गया। एक बार फिर से देव डांगरों का आह्वान किया गया। देव डांगर लोगों को आशीर्वाद दिया। डोले को गजेंद्र सिंह मेहता, लक्ष्मण सिंह मेहता, लाल सिंह मेहता, राजेंद्र सिंह मेहता, नरेंद्र सिंह मेहता, पुष्कर सिंह मेहता, महिपाल सिंह मेहता, विजेंद्र सिंह मेहता आदि ने सजाया। आयोजन में पालिकाध्यक्ष जगत सिंह खाती, एनएसयूआई के प्रदेश महामंत्री दिनेश तिवारी दीनू समेत तमाम लोगों ने शिरकत की।