पिथौरागढ़ के मोस्टमानू में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज। संवाद
पिथौरागढ़। अगले साल सीमांत जिले के नाम नई उपलब्धि जुड़ेगी। मार्च महीने में मेडिकल कॉलेज अस्तित्व में आएगा। इसके तुरंत बाद पहले बैच की पढ़ाई शुरू होगी और यहां कुशल डॉक्टर तैयार होंगे। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मेडिकल कॉलेज को अस्तित्व में लाने के लिए 26 मार्च 2026 की तिथि तय की है। मेडिकल कॉलेज में पहली बार स्थायी प्राचार्य की तैनाती हुई है इससे निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।
जिला मुख्यालय के नजदीक चंडाक के पास मोस्टमानू में 750 करोड़ रुपये से मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य हो रहा है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के मुताबिक मेडिकल कॉलेज का 65 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। विभाग ने इसे अस्तित्व में लाने की तिथि भी तय कर दी है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी सहित अन्य कर्मियों के रहने के लिए आवास तैयार हो चुके हैं। बाल रोग, महिला रोग, दंत रोग, सर्जरी सहित अन्य सभी विभागों के भवन दो महीने में तैयार होंगे। अगले वर्ष तक हर हाल में इसका निर्माण कार्य पूरा होगा। 26 मार्च को यह पूरी तरह अस्तित्व में आएगा इसका लक्ष्य तय हुआ है। इसके तुरंत बाद मेडिकल की पढ़ाई के लिए अनुमति ली जाएगी। इसी वर्ष पहला बैच शुरू होगा और यहां कुशल डॉक्टर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। संवाद
मेडिकल कॉलेज को मिले स्थायी प्राचार्य
पिथौरागढ़। वैसे तो मेडिकल कॉलेज में चार साल पूर्व ही प्राचार्य की तैनाती हो गई थी। इन चार सालों में दो प्राचार्य नियुक्त हुए। दोनों की ही अस्थायी तौर पर नियुक्ति की गई। यह पहला मौका है जब मेडिकल कॉलेज को स्थायी प्राचार्य मिले हैं। दून मेडिकल कॉलेज में तैनात डॉ. एके सिंह को स्थायी तौर पर पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज की जिम्मेदारी मिली है। स्थायी तैनाती होने से निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।
कोट
अगले वर्ष मार्च महीने में मेडिकल कॉलेज को अस्तित्व में लाने का लक्ष्य तय है। इसके तुरंत बाद पहला बैच शुरू होगा। मेडिकल कॉलेज के अस्तित्व में आने के बाद सीमांत जिले के लोगों को बेहतर इलाज मिलेगा और यहां कुशल डॉक्टर भी तैयार होंगे। - डॉ. एके सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़।