इस हाल में है धारचूला के सीपालथौड़ प्राथमिक स्कूल का भवन
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शिक्षा विभाग कई मदों में धन आने के बाद भी गिरने के कगार पर पहुंच चुके विद्यालय भवनों की मरम्मत नहीं कर रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण सीमांत धारचूला का प्राथमिक विद्यालय सीपालथौड़ है। 20 साल पहले बना भवन गिरने की कगार पर पहुंच गया है, लेकिन सरकार और विद्यालयी शिक्षा विभाग नया भवन बनाने की दिशा में कदम नहीं उठा रहा है।
तहसील मुख्यालय धारचूला से 14 किमी की दूरी पर स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय सीपालथौड़ में पढ़ रहे विद्यार्थियों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। वर्ष 1987-88 में बने भवन की दीवारें जर्जर हो गई हैं। लिंटर में बड़े-बड़े छेद हो गए हैं। भवन कभी भी गिर सकता है, लेकिन इससे शिक्षा विभाग और प्रशासन को कोई फर्क नहीं पड़ता। गिरने के कगार पर पहुंचे विद्यालय में ही प्राथमिक स्कूल की कक्षाएं चलाई जा रही हैं।
हादसा होने पर अधिकारियोें पर दर्ज होगा मुकदमा
प्रधान विमला देवी कहती हैं भवन कभी भी हादसे का कारण बन सकता है, विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का जीवन खतरे में है। कई बार मामला शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने उठाया जा चुका है, लेकिन इस गंभीर मामले में कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। प्रधान ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों के सामने उठाए गए सभी दस्तावेजों को संभाल कर रखा है। यदि कोई हादसा हुआ तो विभागीय अधिकारियों के खिलाफ अदालत में नामजद मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
सीपालथौड़ प्राथमिक विद्यालय भवन का मामला संज्ञान में है। प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा रहा है। धन मिलते ही नया भवन बनाया जाएगा।
-शौकत अली, जिला शिक्षाधिकारी बेसिक पिथौरागढ़