मुनस्यारी के जोशा गांव की टैंट में रह रही आपदा प्रभावित महिलाएं। संवाद
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मुनस्यारी/मदकोट। मुनस्यारी के आपदा प्रभावित टांगा, लोधी, धापा और जोशा गांवों के लोगों की जिंदगी खानाबदोश जैसी हो गई है। कुछ परिवार स्कूल भवनों में रह रहे हैं, जबकि ज्यादातर परिवार रात के समय जंगलों में लगाए गए प्लास्टिक के टेंटों में शरण ले रहे हैं। बारिश के दौरान जमीन दरकने का भी लोगों में खौफ है।
19 जुलाई की रात टांगा, लोधी, धापा के साथ ही मुनस्यारी के जोशा गांव में भी बारिश ने जमकर कहर बरपाया। इस गांव में ज्यादातर मकानों में दरारें पड़ चुकी हैं। पहाड़ी से भूस्खलन की चपेट में आने और गांव के नीचे से जमीन खिसकने का भय हर समय लोगों को सता रहा है। इस आपदाग्रस्त गांव के तीन परिवार जोहार सिंह पुत्र अमर सिंह, हर्ष सिंह पुत्र दान सिंह और खगेंद्र सिंह पुत्र हर्ष सिंह ने स्कूल भवन में शरण ली है। कुछ परिवारों ने सुरक्षित स्थानों पर प्लास्टिक के टेंट लगाए हैं। शनिवार रात हुई बारिश से बर्नियागांव में भी खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर देवराज के परिवार को प्राथमिक विद्यालय बर्नियागांव में शिफ्ट कर दिया है। सभी आपदा प्रभावित अपने मवेशियों को भी जंगल में ही बांध रहे हैं।
उधर, 19 जुलाई की रात रोखड़ में तब्दील हुए टांगा गांव के आपदा पीड़ित परिवारों को सेरा स्कूल के भवन में शिफ्ट किया है। यहां पर परिवार के सदस्य तमाम विपरीत हालात में रह रहे हैं। गांव अब रहने लायक नहीं रहा। ऐसे में लोग अपने और अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इसी गांव के लोधी तोक के परिवार भी अब टेंट में शरण लिए हैं। इस गांव में भी बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। अधिक बारिश होने पर घरों के मलबे के साथ मोतीगाड़ नदी में समाने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित करने का इंतजार है।
धापा गांव के 47 परिवार अभी स्कूल भवन और जंगल में प्लास्टिक के टेंट लगाकर रह रहे हैं। 18 जुलाई की रात इस गांव में बारिश ने काफी तबाही मचाई थी। कई घर रहने लायक नहीं रह गए हैं। घरों में भारी मात्रा में मलबा घुसा हुआ है। कई घरों में दरारें पड़ी हैं। बारिश होने पर अभी भी पहाड़ी से निकले मलबे के घरों में घुसने का खतरा बना हुआ है। अधिकांश संपर्क मार्ग भी मुनस्यारी से लिलम धापा सड़क के ध्वस्त होने के कारण गांव तक पहुंचने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
टांगा गांव में लापता दंपति का सुराग नहीं मिला
मदकोट (पिथौरागढ़)। टांगा गांव में 19 जुलाई की रात आई आपदा में लापता 11 लोगों में से नौ लोगों के शव मिल चुके हैं। पति-पत्नी अब भी लापता हैं। रविवार को भी एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवानों ने दिन भर दोनों की तलाश जारी रखी। लापता जीत राम और पार्वती देवी की तलाश के लिए मलबे को काफी दूर तक खोदा गया। देहरादून से आए डॉग स्क्वायड की भी मदद ली गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।