धारचूला के खोतिला गांव में इस तरह दरक रही जमीन
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खोतिला में भूस्खलन के कारण स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। मंगलवार रात एक बार फिर से खोतिला में भारी भूस्खलन हुआ और पुराना रास्ता भी उसकी चपेट में आ गया है। खोतिला में पांच परिवारों की जमीन भूस्खलन की भेंट चढ़ गई है। सबसे बड़ी समस्या बच्चों को स्कूल भेजने में आ रही है। खतरे को देखते हुए फिलहाल लोगों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। कुछ संपन्न परिवारों के लोग अपने बच्चों को लेकर धारचूला बाजार में किराए के कमरे में रहने लगे हैं। प्रशासन ने गांव को जोड़ने वाले दोनों रास्तों से आवाजाही बंद करवा दी है।
बताया गया कि मंगलवार रात फिर से खोतिला के पास की पहाड़ी में जबर्दस्त भूस्खलन हुआ, इससे गांव को जोड़ने वाला पुराना रास्ता भी चपेट में आ गया है। अब 400 परिवारों वाला खोतिला गांव अलग-थलग पड़ गया है। खोतिला से धारचूला बाजार की दूरी मात्र 800 मीटर ही है। गांव तक अभी सड़क नहीं बनी है। लोग पैदल रास्ते से आवाजाही करते हैं। दोनों पैदल रास्ते ध्वस्त हो चुके हैं। यह भूस्खलन बढ़ा तो गांव को भी खतरा हो सकता है। मलबा लगातार महाकाली में गिर रहा है। विकट हालातों से लोग भारी दहशत में हैं। मंगलवार रात भूकटाव में करीब 100 मीटर के एरिया पर दरारें पड़ गई हैं। तहसीलदार इंद्र बहादुर मल्ल ने बताया कि गांव के लोगों को फिलहाल पुराने रास्ते से आने से भी रोक दिया गया है। सोमवार रात हुए भूस्खलन के बाद नया रास्ता बंद किया गया था और लोग पुराने रास्ते से दो किलोमीटर घूमकर आवाजाही कर रहे थे।
प्रशासन ने ऐहतियातन पीआरडी के दो और जवान भी तैनात कर दिए हैं। गांव के लोगों का कहना है कि इस इलाके का तत्काल भूगर्भीय सर्वे किया जाना जरूरी है। साथ ही भूकटाव रोकने और खतरे से घिरे लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी होगी। तहसीलदार ने जिलाधिकारी को सारी स्थिति की जानकारी दे दी है। बता दें कि खोतिला गांव भूस्खलन की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। 2013 में भी यहां भारी भूस्खलन हुआ था। गांव को जोड़ने वाले पैदल रास्ते तबाह हो गए थे। बाद में गांव के लिए महाकाली के किनारे से नया रास्ता बनाया गया, जो इस बार भूस्खलन की चपेट में आ गया है।