फोटो 02 पीटीएच 02 पी- धारचूला के गुंजी में विजयोत्सव की तैयारियों में जुटी महिलाएं। स्रोत: लक्ष
धारचूला (पिथौरागढ़)। व्यास घाटी के गुंजी में 12 वर्ष बाद जुमली ह्या सामो विजयोत्सव मनाया जाता है। आठ अगस्त को शत्रु पुतले का दहन कर अगले दिन विजयोत्सव मनाया जाएगा।
जवाहर नवोदय विद्यालय बागेश्वर के इतिहास प्रवक्ता गोविंद सिंह गुंज्याल (पुजारी) ने बताया कि ऐसी जनश्रुति है कि गुंजी के अमयर च्यंग-अमपंग च्यंग और कौआकोट के हांस्या-गास्या समुदायों के बीच लंबे समय तक वर्चस्व का संघर्ष चलता रहा हांस्या-गास्या समुदाय ने छल से गुंजी के ग्राम प्रमुख की हत्या कर दी। इससे गांव की दैवीय शुभता खंडित हुई और पितृ दोष लग गया। इससे गांव में विपन्नता और जनहानि का दौर प्रारंभ हुआ।
देव आदेश पर ग्रामीणों ने शत्रु के प्रतीकात्मक पुतले का निर्माण कर उसका संहार किया। इससे पितरों की शांति, ग्राम की दैवीय शक्ति की पुनर्स्थापना और शत्रु पर आध्यात्मिक विजय का मार्ग प्रशस्त हुआ।
उन्होंने बताया कि यह परंपरा केवल एक अनुष्ठान नहीं बल्कि पूर्वजों के सम्मान, देव आदेश का पालन, सामुदायिक एकता, सांस्कृतिक अस्मिता व रं विरासत के संरक्षण का जीवंत प्रतीक है।
उत्सव के दौरान ग्रामीण ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस निकालते हुए पुतले को मार कर गुंजी से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर मनीला में पुतला दहन करते हैं। इस उत्सव में समुदाय के सभी लोग बढ़चढ़ कर भागीदारी करते हैं।
गुंजी की ग्राम प्रधान पूर्व आईजी विमला गुंज्याल और सरपंच लक्ष्मी गुंज्याल ने बताया कि विजयोत्सव के लिए महिलाओं की ओर से तैयारी की जा रही है।