एजीएम में अतिथियों का सम्मान करते लोग
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नेपाल के अतिदुर्गम जनजातीय गांव छांगरू में रं कल्याण संस्था का वार्षिक अधिवेशन (एजीएम) संपन्न हो गया। एजीएम में प्रस्ताव लाया गया कि नई पीढ़ी को अपने मूल गांवों में लौटने के लिए प्रेरित किया जाएगा। पर्यटन को रोजगार से जोड़ने की पहल की जाएगी। नेपाल के जनजातियों को आश्वस्त किया गया कि उनके सुख-दु:ख में पूरा साथ दिया जाएगा।
मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड जनजाति आयोग के अध्यक्ष एवं रं कल्याण संस्था के मुख्य संरक्षक नृप सिंह नपलच्याल एवं विशिष्ट अतिथि समाजसेवी एवं रं लिपि निर्माण के संस्थापक नंदराम लाला उपस्थित थे। संचालन करते हुए संस्था के पूर्व महासचिव अरविंद ह्यांकी ने कहा कि सीमांत के जनजातीय समुदाय में सामाजिक एकता को बढ़ावा देने, नई पीढ़ी का रुझान अपने मूल गांवों की ओर बनाए रखने और गांवों से पलायन रोकने के उद्देश्य से रं कल्याण संस्था विगत 6 वर्षों से सीमांत गांवों में वार्षिक अधिवेशन का आयोजन करती आ रही है, जिसे रं महोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
संस्था के अध्यक्ष चंद्र सिंह नपलच्याल ने कहा कि रं समाज ने सदियों से भारत एवं नेपाल की स्वाभाविक मित्रता को बनाए रखा है। इस दौरान कई रंगारंग कार्यक्रमों के प्रस्तुति दी। दोनों देशों से हजारों की संख्या में पहुंचे दर्शकों ने कार्यक्रम का आनंद लिया। कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक धीराज गर्ब्याल ने पर्यटन उद्योग अपनाकर पलायन रोकने की बात की। इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष ग्येल्बो बोरा, पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष अजय नबियाल, स्थानीय शाखा अध्यक्ष अशोक नबियाल, पुष्कर सिंह सैलाल, महिमन ह्यांकी, अतुल गर्ब्याल, गजेंद्र बुदियाल, दौलत फकलियाल, डा. रवि पतियाल सहित कई लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम में अतिथियों डा. शेखर पाठक, भूपेंद्र थापा, राजीव कोहली को भी सम्मानित किया गया।