संयुक्त चिकित्सालय धारचूला में 13 डॉक्टरों का काम चार डॉक्टर देख रहे हैं। अस्पताल में दो डॉक्टर नियमित और दो संविदा पर तैनात हैं। अस्पताल लैब, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे टेक्नीशियन के साथ ही रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त चल रहा है। अस्पताल की अव्यवस्थाओं के कारण लोग निजी अस्पतालों की सेवा लेने को मजबूर हो गए हैं।
मंगलवार को अमर उजाला ने अस्पताल की व्यवस्थाओं की पड़ताल की। सुबह 11 बजे अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीजों की भीड़ थी। अधिकतर लोग वायरल से पीड़ित थे। अस्पताल में कार्यरत दो नियमित और दो संविदा डॉक्टर मरीजों की परीक्षण कर रहे थे। अस्पताल के चिकित्साधीक्षक एमएस जायसवाल के कक्ष के बाहर मरीजों की लाइन लगी थी, वह बारी-बारी मरीजों को देख रहे थे।
11.31 बजे अमर उजाला की टीम मरीजोें के वार्ड में गई, जहां ज्यादातर मरीज वायरल से पीड़ित मिले। अपने सात साल के बच्चे रोहित की तीमारदारी में जुटी खेला निवासी रेनू देवी ने बताया कि सारी दवाईयां बाहर से लानी पड़ रही हैं, अस्पताल से कुछ भी दवाईयां नहीं मिल रही हैं। बगल के वार्ड में अपने आठ साल के बच्चे पर्वत के साथ आई रेखा बुदियाल ने भी अस्पताल से दवा न मिलने की बात बताई। अस्पताल से दवा नहीं मिलने के बारे में फार्मेसिस्ट देवेंद्र सिंह ने बताया कि मार्च में दवाईयां नहीं मिलने से दिक्कत आ आई। अब कुछ दवाईयां पहुंच गई हैं। मरीजों को परेशानी नहीं होगी।
12.15 बजे अस्पताल से बाहर आने पर देखा कि खुशियों की सवारी में एक परिवार अपने नवजात को लेकर घर जा रहा था। लोगों ने बताया गया कि एंबुलेंस सेवाएं सुचारु चल रही हैं। डॉक्टर और स्टाफ की कमी से हो रही दिक्कतों की बात अस्पताल के चिकित्साधीक्षक एमएस जायसवाल भी मानते हैं। उनका कहना था कि कई-कई बार तो डॉक्टरों को 24 घंटे ड्यूटी देनी पड़ती है। डॉक्टरों की तैनाती के लिए अधिकारियों से लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
अस्पताल में रिक्त पद
अस्पताल में चिकित्साधीक्षक के साथ ही एक डेंटल सर्जन तैनात हैं। दो महिला चिकित्सक संविदा पर तैनात हैं। चिकित्सा अधिकारी द्वितीय, सर्जन, गायनोकॉॅलोजिस्ट, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, फिजीशियन, आर्थो सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, नेत्र सर्जन पद रिक्त है। सिस्टर इंचार्ज, डार्क रूम, ओटी असिस्टेंट, लैब असिस्टेंट, कक्ष सेविका, माली का पद भी रिक्त है।
28 उप केंद्रों को संचालित कर रहीं 13 एएनएम
धारचूला विकासखंड के 28 उप केंद्रों को संचालित करने के लिए मात्र 13 एएनएम तैनात हैं। एक एएनएम को दो से तीन सेंटरों का काम देखना पड़ रहा है। तैनात एएनएम में से कई मई में सेवानिवृत्त हो रही हैं, इससे दिक्कत और बढ़ जाएगी।