पिथौरागढ़। महिला स्वास्थ्य को लेकर तमाम जागरूकता अभियान चलाने के साथ ही महिलाओं को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के दावे हो रहे हैं। सीमांत जिले में सभी अभियान और दावे हवाई साबित हो रहे हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले की तीन लाख महिला आबादी का स्वास्थ्य सिर्फ दो विशेषज्ञों के भरोसे है। महिलाओं को जांच के साथ छोटा-बड़ा इलाज कराना हो तो 50 से 120 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय के चक्कर काटना मजबूरी है।
सीमांत जिले के धारचूला, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, मुनस्यारी, डीडीहाट सीएचसी में महिला रोग विशेषज्ञ का पद स्वीकृत है। आज तक इन अस्पतालों में महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। सिर्फ जिला महिला अस्पताल में तैनात दो महिला रोग विशेषज्ञ पर ही जिले की महिलाओं के इलाज की जिम्मेदारी है। ऐसे में किसी भी महिला मरीज को इलाज के लिए तो गर्भवती को जांच से लेकर प्रसव कराने के लिए महिला जिला अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। आम तौर पर महिलाओं के लिए अपनी निजी समस्याएं पुरुष चिकित्सक से साझा करना मुश्किल होता है। ऐसे में महिलाओं के लिए मामूली स्वास्थ्य परामर्श के लिए भी जिला मुख्यालय पहुंचना मजबूरी बना है।
विशेषज्ञ न होने से प्रसव के लिए भी रेफर हो रही हैं गर्भवतियां
सीमांत जिले में महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के दावे दम तोड़ रहे हैं। जिले के सरकारी अस्पतालों में महिला रोग विशेषज्ञ न होने से प्रसव कराना भी मुश्किल हो रहा है। विशेषज्ञ न होने से गर्भवतियों को हायर सेंटर रेफर कर जिम्मेदारी निभाई जा रही है।आपातकालीन सेवा 108 से मिले आंकड़ों के मुताबिक, बीते एक साल में गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, डीडीहाट, मुनस्यारी, धारचूला सीएचसी से 600 गर्भवतियों को प्रसव के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। यदि इन अस्पतालों में महिला रोग विशेषज्ञ होती तो गर्भवतियों का स्थानीय स्तर पर प्रसव होता और उन्हें जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
अल्ट्रासाउंड में कराने में होती है परेशानी
सीमांत जिले में गर्भवतियों के लिए अल्ट्रासाउंड कराना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। जिला अस्पताल को छोड़कर अन्य किसी भी सरकारी अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। ऐसे में जिले की सभी गर्भवतियों के लिए अल्ट्रासाउंड कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंचना मजबूरी है।
कोट
महिला रोग विशेषज्ञ के रिक्त पदों की सूचना शासन को भेजी है। विशेषज्ञों की तैनाती शासन स्तर पर ही संभव है। - डॉ. एसएस नबियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़