दादी की चिता को मुखाग्नि देने पहुंची पोती
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महिलाएं तमाम रूढ़िवादी विचारों, मान्यताओं को ठेंगा दिखाते हुए आगे बढ़ रही हैं। ऐसी ही एक महिला ने अपनी दादी की चिता को मुखाग्नि देकर समाज के सामने एक नया उदाहरण पेश किया है।
ग्राम भन्यूड़ा (हिनकोट) की माधवी देवी (90) लंबे समय से बीमार थीं। शुक्रवार को इलाज कराकर खटीमा से लौट रहीं माधवी देवी की पिथौरागढ़ के पास मृत्यु हो गई। परिजन माधवी देवी के शव को घर लाए। माधवी देवी के सेना में कार्यरत इकलौते पुत्र पुष्कर सिंह 25 साल पहले देश की सुरक्षा करते हुए शहीद हो गए थे। गांव में माधवी देवी को मुखाग्नि कौन देगा, इस पर बात होने लगी।
माधवी देवी की एकलौती पोती शिक्षिका विमला पानू ने दादी की चिता को मुखाग्नि देने का निर्णय लिया। विमला के हौसले के सामने सबको सहमति जतानी पड़ी। हिंदू समाज में महिलाओं का मुखाग्नि देना तो दूर शवयात्रा में भी शामिल होना भी वर्जित बताया जाता है। शनिवार को जौलजीबी श्मशान घाट पर विमला ने दादी की चिता को मुखाग्नि दी।