उच्च हिमालय के गांवों से मौसमी प्रवास पर निकलने का क्रम शुरू हो गया है। बुधवार को क्वीरीजिमिया गांव से पहला जत्था तराई के लिए निकला। क्वीरीजिमिया के लोग अप्रैल में जानवरों समेत तराई से अपने मूल गांव लौट आए थे और जानवरों को लेकर मिलम के बुग्यालों में निकल गए थे। अब उच्च हिमालयी क्षेत्रों में धीरे-धीरे ठंड बढ़ने लगी है। इसी के साथ गांवों से लोग तराई को रवाना होने लगे हैं।
क्वीरीजिमिया गांव का यह पहला जत्था करीब 25 दिन बाद तराई पहुंचेगा। एक दिन में यह लोग अपनी भेड़ों के साथ 10 से 15 किलोमीटर तक का सफर करते हैं और पड़ावों में रुकते रहते हैं। एक गांव से करीब आठ दस परिवार एक साथ प्रवास पर निकलते हैं। इनके साथ कम से कम 2000 भेड़ें रहती हैं। घरेलू सामान ढोने के लिए घोड़े भी होते हैं। क्वीरीजिमिया निवासी देवेंद्र देवा ने बताया कि मौसमी प्रवास का यह क्रम उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अतीतकाल से चला आ रहा है। लोग शीतकाल में गर्म घाटियों में चले जाते हैं और गर्मी का सीजन शुरू होते ही उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लौट आते हैं। एक स्थान पर इनका प्रवास छह माह का रहता है। अब पातो, साईपोलू, बोना, लीलम, बुई, लेगा, तोमिक गांवों के लोग भी माइग्रेशन की तैयारी करने लगे हैं। 15 अक्तूबर तक सभी गांवों से लोग घाटियों में उतर जाएंगे। मौसमी प्रवास पर ज्यादातर भेड़पालक लोग ही जाते हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में नवंबर से हिमपात होने लगता है। आवागमन के रास्ते बंद हो जाते हैं। इस कारण यह लोग हिमपात से पहले ही अपना गांव छोड़ देते हैं।