लिपुलेख दर्रा पार कर भारतीय क्षेत्र में पहुंचा कैलास यात्रियों का अंतिम दल
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कैलास मानसरोवर की यात्रा पूरी कर अंतिम और 18वें दल के 38 सदस्यों ने रविवार सुबह 7.15 बजे लिपुलेख दर्रा पार कर भारतीय सीमा में प्रवेश कर लिया। चीन के सुरक्षा बलों के जवान और अधिकारी यात्रियों को लिपुलेख दर्रे तक छोड़ने आए थे। लिपुलेख दर्रे पर माहौल बेहद भावुक हो गया। अब यात्रा अगले वर्ष जून में ही शुरू होगी। अब कैलास मानसरोवर क्षेत्र में कोई भी यात्री दल नहीं है। रविवार को यात्री गुंजी पड़ाव पहुंच गए हैं। नौ सितंबर को यात्री दिल्ली पहुंचेंगे। इसी के साथ कैलास मानसरोवर यात्रा 2016 का विधिवत समापन हो जाएगा।
अंतिम दल के लायजन आफीसर उत्तराखंड के आईपीएस अधिकारी संजय गुंज्याल हैं। आठ महिलाओं समेत कुल 38 सदस्यों वाले इस दल ने बेहतरीन ढंग से कैलास मानसरोवर की परिक्रमा पूरी की। आईटीबीपी सातवीं वाहिनी के सेनानी महेंद्र प्रताप ने बताया कि अब अंतिम दल के साथ ही यात्रा मार्ग पर तैनात मेडिकल टीम, रेस्क्यू के लिए तैनात जवान और अतिरिक्त तौर पर यात्रा मार्ग में तैनात किए गए जवान भी वापस आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि सौभाग्य से इस बार किसी भी यात्री के साथ कोई घटना नहीं हुई। मौसम ने काफी अच्छा साथ दिया। पैदल रास्तों की हालत भी अपेक्षाकृत सही रही। उन्होंने कहा कि आईटीबीपी ने यात्रा को काफी बेहतर ढंग से संपन्न कराने में सहयोग दिया।
उधर, पुलिस अधीक्षक रोशन लाल शर्मा ने बताया कि यात्रा मार्ग पर तैनात एसडीआरएफ, पुलिस के जवान अब यात्रियों के साथ ही वापस आ जाएंगे। वायरलेस कर्मियों की टीम भी आ जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस ने यात्रा को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में बेहतरीन काम किया।