जौलजीबी में महाकाली पर बना झूलापुल
- फोटो : अमर उजाला
भारत, नेपाल एवं तिब्बत की सीमा पर स्थित जौलजीबी कस्बे में हर साल 14 नवंबर से लगने वाले ऐतिहासिक और व्यापारिक महत्व के मेले की तैयारी के लिए पांच नवंबर को जौलजीबी में बैठक होगी। इस बार महाकाली के तट पर मेला स्थल को समतल कर दिया गया है। वहां पर कम से कम तीन हजार अस्थायी दुकानें लग जाएंगी। पिछले साल तक 1500 अस्थायी दुकान लगती थी। जिलाधिकारी डा. रंजीत सिन्हा की अध्यक्षता में पांच नवंबर को होने वाली बैठक में सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
जौलजीबी मेले में तिब्बत से लाए गए सामान की भी अच्छी खासी बिक्री होती है। इस बार तिब्बत से कम मात्रा में सामान का आयात हुआ है, इस कारण मेले में तिब्बती ऊन, जैकेट, जूते जैसी सामग्री की कमी हो सकती है। जौलजीबी के लोगों ने भी अपने स्तर से मेले की तैयारी शुरू कर दी है। 14 से 19 नवंबर तक चलने वाले मेले में व्यापारिक गतिविधियां काफी तेज हो जाती हैं। कुमाऊं के सभी स्थानों के अलावा नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए आते हैं।
जौलजीबी की सामाजिक कार्यकर्ता लीला बनंग्याल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर इस ऐतिहासिक मेले में ज्यादा सुविधाएं जुटाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मेले में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए ज्यादा धन दिया जाए और कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि सभी प्रमुख सरकारी विभागों के स्टाल मेले में लगाए जाने चाहिए।
झूलापुल को लेकर लोग आशंकित
जौलजीबी में महाकाली पर बने झूलापुल की एक ओर की दीवार टूटने से लोग आशंकित हैं। यदि मेले के दिन पुल से ज्यादा लोग आने-जाने लगेंगे तो पुल को खतरा हो सकता है। पुल का निर्माण पिछले साल नेपाल सरकार ने किया था। पुल बनने के बाद से नेपाल के इंजीनियरों ने पुल का निरीक्षण नहीं किया है। जौलजीबी के व्यापारी कई बार एसडीएम के माध्यम से पुल की दुर्दशा की जानकारी नेपाल सरकार को भेज चुके हैं। बताया गया कि पुल की लंबाई ज्यादा होने के कारण यह लोगों के चलते वक्त बहुत हिलता है।