नाचनी (पिथौरागढ़)। रामगंगा में बनी झील का दायरा बढ़ने से खतरा भी बढ़ने लगा है। झील का दायरा एक किलोमीटर तक पहुंचने से छीपा, बांसगून के साथ ही बागेश्वर के काभड़ी में भूस्खलन शुरू हो गया है। जमीन गीली और कमजोर होने से दरकने लगी है इससे इन गांवों में रहने वाले लोग दहशत में हैं। वहीं यदि अचानक झील टूटी तो इससे नाचनी बाजार को भी खतरा हो सकता है। ऐसे में झील का दायरा बढ़ने के साथ ही बाजार सहित आसपास रह रहे लोगों की चिंता बढ़ने लगी है।
तीन दिन पूर्व हुई भारी बारिश के दौरान हरड़िया की पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर रामगंगा में समा गए थे। इससे नदी में 600 मीटर लंबी झील बन गई। रविवार को झील का क्षेत्र बढ़कर 800 मीटर हो गया था। बीते रविवार को हुई भारी बारिश के बाद अब झील का दायरा एक किलोमीटर तक पहुंच गया है।
गंगा की तलहटी में काफी मात्रा में मलबा एकत्र होने से झील की लंबाई और जलस्तर लगातार बढ़ रहा है इससे किनारे बसे गांव बासगुन, छीपा, भैंसखाल के साथ ही बागेश्वर के काभड़ी गांव के नीचे भूस्खलन शुरू हो गया है। ऐसे में ग्रामीणों के साथ ही निचले इलाके में बसे नाचनी बाजार और आसपास रहने वाले लोग दहशत में हैं। आशंका है कि झील बढ़ने से भूस्खलन की रफ्तार भी बढ़ेगी इससे इन गांवों को गंभीर खतरा हो सकता है।
सिंचाई विभाग के अभियंता झील पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। विभाग के अपर सहायक अभियंता एसएस बिष्ट ने बताया कि रात में हो रही बारिश से हरड़िया की पहाड़ी से भारी मलबा गिर कर रामगंगा की तलहटी में समा रहा है। इससे झील का आकार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि नदी से पानी की निकासी बरकरार है। उन्होंने लोगों को झील के किनारे नहीं जाने के लिए सावधान किया है।
हरड़िया में 10 घंटे बंद रही थल-मुनस्यारी सड़क
क्षेत्र में रात भर हुई भारी बारिश से पर्यटन नगरी को जोड़ने वाली थल-मुनस्यारी सड़क हरड़िया में 10 घंटे तक बंद रही। लोनिवि ने मलबा हटाकर सोमवार सुबह 10 बजे सड़क को यातायात के लिए खोला। इस दौरान वाहन चालक और यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। होकरा-नामिक सड़क पोथी रौली पर पहाड़ टूटने से बंद है। पीएमजीएसवाई ने सड़क खोलने के लिए जेसीबी भेज दी है। भैंसकोट, बांसबगड़, कोटा आदि सड़कों पर मलबा हटाने के लिए जेसीबी लगाई गई है।