गंगोलीहाट के जाखेड़ी निवासी राधे राम वर्ष 2014 से कांच के छज्जे में रहने को मजबूर हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़। वर्ष 2014 की आपदा में दो मंजिला मकान ध्वस्त होने के बाद गंगोलीहाट जाखेड़ी का राधे राम का परिवार कांच के छज्जे (छाने) में रहने को मजबूर है। बावजूद इसके शासन प्रशासन को राधे राम का दर्द नहीं दिख रहा है। आपदा के सदमे को राधे की पत्नी सह नहीं पाई थी और आपदा के कुछ दिन बाद दम तोड़ दिया था। वहीं उनका एक लड़का आपदा के बाद मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया, लेकिन सरकार और शासन प्रशासन की ओर से उनकी कोई मदद नहीं की गई। धूप हो या बारिश या फिर सर्दी राधे राम का परिवार वर्ष 2014 से कांच के छज्जे में रहने को मजबूर है।
गंगोलीहाट के जाखेड़ी के 63 वर्षीय राधे राम ने बताया कि 2014 की आपदा के बाद उनके सिर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उन्होंने बताया कि इस आपदा के सदमे से उनकी पत्नी दुनिया छोड़कर चली गई। एक बेटा मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से मात्र 6300 रुपये की आर्थिक मदद की थी। उन्होंने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास दिलाने का आश्वासन भी दिलाया गया था, लेकिन उन्हें अभी तक आवास नहीं मिल पाया। राधे राम खैरोली बाजार में लोगों के कपड़े सिल कर अपना भरण पोषण करते हैं। दूसरा बेटा राज मिस्त्री का कार्य करता है। सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश कुमार का कहना है कि वो उनका मामला डीएम के पास रखेंगे।
---::: बोले एसडीएम:: "शासन के मानकों के अनुसार ही मुआवजा मिलता है। व्यक्तिगत रूप से भी परिवार की मदद की जाएगी।" -भगत सिंह फोनिया, एसडीएम गंगोलीहाट।