देवलथल तहसील के बमडोली गांव में रविवार रात जंगली मशरूम खाने से एक ही परिवार के पांच लोग बीमार हो गए। इनमें गंभीर रूप से बीमार एक बालिका की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि इलाज के बाद अन्य को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
बमडोली गांव में शंकर राम के परिवार के लोगों ने रविवार रात जंगल से लाकर मशरूम की सब्जी बनाई। परिवार के सभी पांचों सदस्यों ने सब्जी खाई। सब्जी खाने के थोड़ी देर बाद सभी लोगों को उल्टियां आने लगीं और बेहोशी के दौरे पड़ने लगे। पड़ोस के लोगों ने रात ही सभी को जिला अस्पताल पहुंचाया। जिला अस्पताल में भर्ती होने के बाद परिवार के अन्य सदस्यों की तबियत में तो सुधार आने लगा लेकिन शंकर राम की सात वर्षीय बेटी चांदनी की उल्टियां बंद नहीं हुई। सोमवार तड़के उसने दम तोड़ दिया।
शंकर राम (45), उनकी पत्नी सुनीता (40), बेटा ललित (14) और बड़ी बेटी कविता (12) की तबियत ठीक होने पर सभी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
जिला अस्पताल के डा. नरेंद्र शर्मा का कहना है कि पहाड़ों में इन दिनों प्राकृतिक रूप से जंगलों में मशरूम पैदा होता है। इनमें से कई प्रजातियां विषैली भी होती हैं। किसी भी दशा में जंगली मशरूम खाने का रिस्क नहीं लेना चाहिए।
सब्जी मंडी में बिकने वाला मशरूम ही खाना चाहिए। जंगली मशरूम का ऊपरी हिस्सा रोटी के बराबर बड़ा होता है। मशरूम में टाक्सिन पाया जाता है। टाक्सिन शरीर में जाने से व्यक्ति की मौत हो जाती है।