कारगिल युद्ध में देश के लिए लड़ने वाले पिथौरागढ़ और चंपावत जिले के जाबांज सैनिकों का आज भी सीना चौड़ा हो जाता है। देश के लिए मर मिटने का उनका जज्बा आज भी कायम है। उस जंग को याद कर वे जोश से भर जाते हैं। उनके फौलादी इरादे बताते हैं कि उस वक्त किस तरह दुश्मन को खदेड़ने या नामो निशान मिटाने का संकल्प उनमें कूट-कूटकर भरा था। इस जंग में दोनों जिलों के कई सैनिकों को हमने खोया है। अपनी जान की परवाह किए बगैर उन्होंने जिस प्रकार का शौर्य और पराक्रम दिखाया उससे हर व्यक्ति गौरवान्वित महसूस करता है। पेश है कारगिल जंग के गवाह रहे लोगों की जुबानी, युद्ध की कहानी।
गोली हेलमेट से टकराई और मार डाले पाकिस्तानी जवान
डीडीहाट (संजू पंत)। हाट थर्प निवासी सूबेदार मेजर बसंत लाल साह कारगिल युद्ध को याद कर जोश से भर जाते हैं। 603 ईएमई बटालियन में सूबेदार मेजर के पद पर तैनात बसंत लाल को 21 जुलाई 1999 का दिन याद आते ही युद्ध के मैदान की याद आ जाती है। 21 जुलाई को कारगिल युद्ध के दौरान वह अपने कर्नल जीएस गुरौन के साथ तकनीकी एडवाइजर के रूप में तैनात थे। उस दिन पाकिस्तानी फौज कारगिल में जबरदस्त गोलीबारी कर रही थी। सुबह आठ बजे वह और कर्नल गुरौन ने अपने बंकर को छोड़कर जाने का निर्णय लिया। जैसे ही वह अपने बंकर से निकलकर गाड़ी की तरफ गए तभी एक गोली सूबेदार मेजर बसंत की हेलमेट से टकरा गई। उसके बाद वह जोश से भर गए। उन्होंने जवाबी फायरिंग करके दो से तीन पाकिस्तानी जवानों को मौत के घाट उतार दिया और अपने कर्नल के साथ दूसरे साथियों के बंकर में जाकर उन्हें युद्ध के लिए तकनीकी सहायता देना शुरू कर दिया। 603 ईएमई बटालियन की तकनीकी सहायता के चलते पाकिस्तानी फौज भारतीय फौज के हमलों का जवाब देने में विफल होने लगी थी। सूबेदार मेजर साह कहते हैं कि उसका फायदा हमें मिला और 26 जुलाई 1999 में हमने कारगिल युद्ध को जीत लिया। संवाद
घायल होने से पहले पाक के पांच सैनिकों को उतारा था मौत के घाट
चंपावत। चंपावत के फौजी दान सिंह मेहता ने कारगिल युद्ध में बहादुरी की मिसाल पेश की थी। वे क्षेत्र के युवाओं को सेना की सेवा में जाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। युवाओं को सेना को कॅरिअर बनाने के साथ देश सेवा के लिए प्रेरित करते हैं। शारीरिक परीक्षा के लिए जरूरी तैयारी का परामर्श देना और लिखित परीक्षा की तैयारी के लिए वे निरंतर मार्गदर्शन दे रहे हैं।
चंपावत के फौजी दान सिंह मेहता ने 1999 में हुए कारगिल युद्ध में अदम्य शौर्य दिखाया था। 12 जाट रेजीमेंट के नायक दान सिंह मेहता ने युद्ध के दौरान भारत-पाक नियंत्रण रेखा के पास बीगैप की पोस्ट में दुश्मन का बहादुरी से मुकाबला किया। 16 गोलियां लगने के बाद भी मोर्चा नहीं छोड़ा था। कुपवाड़ा में पाकिस्तान के पांच सैनिकों को मारने के बाद वे गोली लगने से बुरी तरह घायल हो गए थे। सेना की सेवा के बाद दो दशक से वे यहां दुकान चला गुजर कर रहे हैं। संवाद
कुंडल ने 21 साल की उम्र में दे दी प्राणों की आहुति
पिथौरागढ़। जिले के चार वीरों किशन सिंह भंडारी, गिरीश सिंह सामंत, जौहार सिंह और कुंडल बेलाल ने इस जंग में अपने प्राण न्योछावर किए। कुंडल बेलाल ऐसे वीर थे जिन्होंने महज 21 साल की उम्र में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।
जजुराली गांव निवासी लांसनायक किशन सिंह भंडारी कारगिल युद्ध में दुश्मनों से लोहा लेते शहीद हो गए थे। उनकी पत्नी और तीन बच्चे हैं। वर्तमान में उनका परिवार पिथौरागढ़ में रहता है। देवलथल क्षेत्र उड़ई गांव निवासी हवलदार गिरीश सिंह सामंत कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए शहीद हुए थे। शहीद के नाम से गैस एजेंसी का संचालन किया जा रहा है। शहीद का परिवार पिथौरागढ़ में रहता है। मड़मानले गांव निवासी जौहार सिंह भी कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे। उनकी पत्नी और बेटी पिथौरागढ़ में रहते हैं।
कारगिल में शहीद होने वाले चार जाबांजों में कुंडल सिंह बेलाल ऐसे वीर थे जिन्होंने मात्र 21 साल की उम्र में अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया था। कारगिल की पहाड़ियों में दुश्मन से लोहा लेने के दौरान कुंडल सिंह हजारों फुट गहरी खाई में गिरकर सदा के लिए धरती माता की गोद में सो गए। गहरी खाई और बर्फ के कारण उनका पार्थिव शरीर नहीं लाया जा सका। शहीद कुंडल की माता कूना देवी और पिता राम सिंह बेलाल को पुत्र की शहादत पर गर्व तो है लेकिन अंतिम बार अपने लाल का चेहरा न देख पाने की टीस भी हर बार आंखों से छलक आती है। संवाद
कारगिल शहीद गिरीश सिंह सामंत की स्मृति में शहीद द्वार का अनावरण
पिथौरागढ़। 25 जुलाई 1999 को शहीद हुए गिरीश सिंह सामंत की स्मृति में निर्मित शहीद द्वार का अनावरण किया गया। इस दौरान उनके शौर्य और पराक्रम को याद किया गया।
मंगलवार को देवलथल के मेलापानी में निर्मित शहीद द्वार का अनावरण उनकी वीरांगना शांति सामंत ने किया। वक्ताओं ने कहा कि कारगिल युद्ध में विषम परिस्थितियों से सामना करते हुए पाकिस्तान के नापाक इरादों को चकनाचूर किया था। उन्होंने अग्रिम सैन्य चौकियों को वापस कब्जा करने और असीम युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया था। इस दौरान नौ पैरा एसएफ के हवलदार गिरीश सामंत शहीद हो गए थे। शहीद के चित्र पर पूर्व सैनिकों के सूबेदार शंकर सिंह,पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष मेजर ललित सिंह सामंत ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वीरांगना शांति सामंत ने कहा कि शहीद की पुण्यतिथि पर शहीद द्वार बनने से शहीद का सम्मान हो पाया है। कार्यक्रम में मयूख भट्ट, राजेंद्र चंद्र कापड़ी ,केशर सिह सामंत, उमेश फुलेरा, उमेश तिवारी, राजेंद्र जोशी, संजय प्रसाद, रमेश सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे। संवाद
विजय दिवस पर चंपावत, लोहाघाट में होंगे कार्यक्रम
चंपावत/लोहाघाट। कारगिल विजय दिवस पर 26 जुलाई को चंपावत के शहीद स्मारक में कार्यक्रम होंगे। चंपावत के शहीद स्मारक स्थल में कारगिल के शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने वालों का सम्मान किया जाएगा। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) वीपी भट्ट ने बताया कि इससे पूर्व बस स्टेशन से शहीद स्मारक तक रैली निकाली जाएगी। लोहाघाट में भी शहीद स्मारक पर पूर्व सैनिक श्रद्धांजलि देंगे। पूर्व सैनिक लीग के अध्यक्ष कैप्टन राजेंद्र सिंह देऊ ने बताया कि प्रभात फेरी निकालने के अलावा सैनिक विश्राम गृह में पूर्व सैनिकों और वीरांगनाओं को सम्मानित किया जाएगा।