कैलाश भूक्षेत्र पर आधारित पुस्तिका का विमोचन करते लोग
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वित्त, संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि समाज में परिवर्तन तभी आता है, जब समाज आगे खड़ा होता है। उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर हिमालय को बचाना होगा। मंत्री भारत, चीन, नेपाल के संयुक्त तत्वावधान में और एकीकृत पर्वतीय विकास के अंतरराष्ट्रीय केंद्र के सहयोग से वर्ष 2013 से चलाई जा रही पवित्र कैलाश भू-क्षेत्र एवं विकास पहल की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर कैलाश भू-क्षेत्र परियोजना के तहत कराए गए कामों पर आधारित पुस्तिकाओं का विमोचन किया गया।
जिला पंचायत सभागार में आयोजित कार्यशाला में मंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जहां एक ओर जैव विविधता है, वहीं पवित्र धार्मिक स्थल भी हैं, जहां विभिन्न नदियों का उद्गम होता है। इस क्षेत्र को बचाए रखने और इसके संरक्षण, संवर्धन के लिए परियोजना के अंतर्गत किए गए कार्यों से निश्चित रूप से फायदा होगा। वर्ष 1930 में जब वन पंचायतों का गठन किया गया, उस समय सभी लोग जंगलों से जुड़े थे। जंगलों का सही उपयोग किया जाता था। वर्ष 1980 में वन संरक्षण अधिनियम लागू होने के बाद मनुष्य और जंगलों के संबंधों में दूरियां बढ़ती चली गई। इन दूरियों को घटाने के लिए आपसी सामंजस्य के साथ कार्य करना होगा।
मंत्री ने कहा कि परियोजना के दूसरे चरण में जन जागरूकता अभियान चलाया जाना है, जिसके माध्यम से यहां आजीविका बेहतर होगी और पलायन रुकेगा। जिलाधिकारी सी रविशंकर ने कहा कि गांवों से हो रहे पलायन को रोकने के लिए किसानों की आय दोगुनी करने पर काम चल रहा है। इस दौरान भारतीय वन्यजीव संस्थान के डीन डॉ. जीएस रावत, उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव एसएस रसायली ने विचार रखे। कैलाश परियोजना के नोडल डॉ. आरएस रावल ने भारतीय क्षेत्र में किए गए कार्यों की जानकारी दी। डॉ. राजन कोतरू ने भारतीय सहयोगियों द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की। इस दौरान पालिकाध्यक्ष जगत सिंह खाती, चिया संस्था के निदेशक डॉ. पंकज तिवारी, डॉ. गजेंद्र सिंह, डॉ. राजेंद्र बिष्ट, डॉ. राजेश जोशी, डॉ. आईडी भट्ट आदि मौजूद थे।