पिथौरागढ़। सीमांत जनपद के कनालीछीना विकासखंड के सतगढ़ गांव से एक अनूठी और गौरवशाली पहल की शुरुआत हुई है। अब जिले का हर घर किसी पुरुष के नाम से नहीं बल्कि उस घर की बेटी या महिला के नाम से पहचाना जाएगा। जिला प्रशासन और बाल विकास विभाग के संयुक्त प्रयासों से शुरू हुए मेरी चेली म्यर घरै पछ्यांण (मेरी बेटी, मेरे घर की पहचान) अभियान के तहत घरों के बाहर बेटियों के नाम की पट्टिकाएं लगाई जा रही हैं।
डीएम आशीष कुमार भटगांई, ग्राम प्रधान अंजू कापड़ी और बाल विकास अधिकारी डॉ. निर्मल बसेड़ा ने संयुक्त रूप से अभियान की शुरुआत की। डीएम ने गांव की बेटियों को उनके नाम की पट्टिकाएं भेंट कीं और स्वयं कई घरों के द्वार पर जाकर उन्हें चस्पा किया।
इस मौके पर ग्रामीणों और अधिकारियों ने बेटी बचाने और बेटी पढ़ाने की सामूहिक शपथ ली। डीएम ने कहा कि यह पहल समाज में महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण बदलने का एक सशक्त माध्यम बनेगी। जब घर की पहचान बेटी के नाम से होगी तो महिला सशक्तीकरण को वास्तविक धरातल पर बल मिलेगा।
इस मौके पर पूर्व प्रधान सावित्री कापड़ी, राजेंद्र कापड़ी, कैलाश कापड़ी, दीपक कापड़ी, भुवन कापड़ी, गणेश दत्त आदि मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने की बंद कलवर्ट खोलने की मांग
सतगढ़ के ग्रामीणों ने जिले की आस्था का केंद्र प्रसिद्ध छुरमल मंदिर तक सीसी मार्ग का निर्माण, धारचूला हाईवे पर बंद कलवर्ट खोलने की मांग की। ग्रामीणों ने कहा कि उनके गांव के दायरे में हाईवे पर अधिकांश कलवर्ट बंद कर दिए हैं जिन्हें नहीं खोला गया तो टीआरसी के पास बहने वाले नाले का पानी उनके खेतों को बहा ले जाएगा। इससे आपदा जैसी घटनाएं भी सामने आएंगी।