बोल्डर गिरने से क्षतिग्रस्त एसएसबी की बैरक।
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साेमवार की रात चट्टान टूटने और इस कारण धारचूला-तवाघाट एनएच के बंद रहने से व्यास, दारमा और चौदास घाटियों का शेष दुनिया से संपर्क कटा रहा। आदि कैलाश यात्रियों के साथ ही पर्यटक तो परेशान रहे ही, वहीं विभिन्न कार्यों के लिए तहसील मुख्यालय धारचूला के लिए घरों से निकले लोगों को भी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
ऐलागाड़ के पास चट्टान टूटने से रात नौ बजे सड़क बंद हो गई थी। जब सुबह दोनों ओर से वाहन ऐलागाड़ पहुंचने लगे तो सड़क किनारे कतार लगनी शुरू हो गई। कुछ देर तक लोगों ने वाहनों में बैठकर इंतजार किया। तपती गर्मी के बीच जब सड़क खुलने की कोई संभावना नजर नहीं आई तो कुछ लोगों ने चट्टानों के बीच से पैदल ही दूसरी ओर जाने का निर्णय लिया।
प्राइवेट वाहनों से यात्रा पूरी कर लौटे कई यात्री भी चट्टानों के ऊपर से इस ओर आने के बाद दूसरे वाहन से धारचूला पहुंचे। इधर सड़क न खुलती देख आदि कैलाश के लिए निकले यात्री लौटकर धारचूला आ गए। अपने गांवों को लौट रहे स्थानीय घाटियों के लोगों को भी वाहनों से उतरकर घरों तक पैदल ही जाना पड़ा। आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन कर लौट रहे अधिकांश यात्रियों को बूंदी में ही रुकने की सलाह दी गई। देर शाम तक सड़क खोलने का कार्य जारी था। बुधवार सुबह से यातायात सुचारु होने की उम्मीद है।
आवाजाही के लिए बंद रखा गया झूलापुल
अंतरराष्ट्रीय झूलापुल के ठीक ऊपर पहाड़ी दरकने के कारण ऐलागाड़ में भारत-नेपाल के बीच आवागमन बंद रहा। ऐलागाड़ के ठीक दूसरी ओर नेपाल में बड़गांव स्थित है। इस क्षेत्र के लोग इसी झूलापुल से आवागमन करते हैं लेकिन खतरे को देखते हुए आवाजाही पर रोक लगाई गई है।