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पुल के अभाव में नहीं मिला सड़क का लाभ

Fri, 12 Jan 2018 10:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
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तड़ीगांव के पास रुका हुआ पुल निर्माण का काम - फोटो : अमर उजाला
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बेड़ीनाग से पुरानाथल होते हुए तड़ीगांव तक प्रस्तावित सड़क पर रामगंगा में मोटर पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। सड़क बीस साल पहले बन गई थी और सात साल पहले रामगंगा पर पुल बनाने के लिए दीवारों का निर्माण भी कर दिया गया था, लेकिन पुल का ढांचा खड़ा नहीं हो पाया है। इस कारण 50 हजार की आबादी को सड़क सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया है। लोगों को आज भी पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय जाने के लिए बेड़ीनाग, थल होते हुए 60 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है। यदि पुल बन जाता तो इन गांवों के लोगों को कम दूरी तय करनी पड़ती। तड़ीगांव में इस सड़क को थल-पिथौरागढ़ सड़क से जोड़ने की योजना थी।

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रामगंगा में पुल नहीं बनने से तड़ीगांव, पुरानाथल, रूइनाथल, गंगोरा, पीपलतड़, जाजर, बलगड़ी, बाननी, माछीखेत, चनकाना, बड़ेत, थर्प, कालीविनायक, खनात, गड़तिर, बेलकोट, ग्वीर, बरसायत, लिकतड़, कालासिला, चौपाता समेत कई गांवों के लोगों को यातायात की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस मामले में लोनिवि के सहायक अभियंता एनसी पलड़िया ने बताया कि लोनिवि ने पुल के निर्माण का काम शुरू किया था। साढ़े पांच मीटर लंबे इस पुल के लिए छह करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाया गया था, लेकिन अब सरकार पुल का निर्माण लोनिवि के माध्यम से कराने के बजाय विश्व बैंक निर्माण खंड से कराने की तैयारी में है। इसी कारण पुल का काम रुका है। 

सरकार जनसुविधा का ध्यान दे
उक्रांद नेता सलीम अहमद का कहना है कि सरकार को जनसुविधा का ध्यान देना चाहिए। दो विभागों के पेच में पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। जिस विभाग को भी पुल बनाना है वह काम शीघ्र पूरा करे और लोगों को यातायात की सुविधा दी जाए। उन्होंने कहा कि बहुत बड़ी आबादी को यातायात सुविधा से वंचित रखना उचित नहीं है। उन्होंने जल्दी पुल बनाने की मांग की है। 
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पुल का निर्माण क्यों रोका, इसकी जांच हो
सामाजिक कार्यकर्ता नवीन पाठक का कहना है कि सड़क बनाने के बाद पुल का निर्माण रोकना संदेह पैदा करता है। उन्होंने कहा कि पुल का काम क्यों रोका गया, इसकी जांच होनी चाहिए। क्या सात साल में किसी पुल का काम दूसरे विभाग को हस्तांतरित नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि यह सरासर सरकारी धन का दुरुपयोग है और इसमें प्रशासन को सख्त कदम उठाना चाहिए।

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