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थल-मुनस्यारी मार्ग 15 घंटे बाद खुला

Thu, 06 Sep 2018 11:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुनस्यारी
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मुनस्यारी-बनिक सड़क में पुल पर लटका पिकप वाहन - फोटो : अमर उजाला
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क्षेत्र में बुधवार रात फिर जमकर बारिश हुई। इससे बनिक के पास भारी मात्रा में मलबा एवं बोल्डर गिर गए और शाम छह बजे सड़क बंद हो गई। करीब 15 घंटे बंद रहने के बाद सड़क को सुबह नौ बजे खोला जा सका। अब भी सड़क पर संभावित खतरा बना है।

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थल-मुनस्यारी मार्ग पर रातीगाड़, कक्कड़ सिंह बैंड से निपटने के बाद अब बनिक के पास नया डेंजर जोन बन गया है। पिछले तीन दिनों से यहां पर पहाड़ी से मलबा और बोल्डर लगातार गिर रहे हैं। बुधवार को क्षेत्र में हुई तेज बारिश से सड़क शाम छह बजे बंद हो गई। सूचना पर बृहस्पतिवार सुबह नौ बजे लोनिवि के जेसीबी ऑपरेटर लक्ष्मण सिंह सयाला मौके पर पहुंचे और सड़क से मलबा, बोल्डर हटाने का कार्य शुरू किया।

उन्होंने बताया कि ऊपरी पहाड़ी से भूस्खलन का खतरा लगातार बना है। दरकती पहाड़ी के बीच वह जान जोखिम में डालकर मलबा हटाने में जुटे हैं। बृहस्पतिवार को मौसम साफ रहा। हालांकि उच्च हिमालयी क्षेत्र हंसलिंग, राजरंभा और पंचाचूली की पहाड़ियां बादलों से ढकी हैं।
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बाल-बाल बचा वाहन
मुनस्यारी। डाडाधार-घोरपट्टा मार्ग पर एक पिकअप वाहन नाले में गिरने से बच गया। बाद में ग्रामीणों की मदद से वाहन को बमुश्किल निकाला जा सका। मुनस्यारी से एक पिकअप वाहन का चालक सामान छोड़ने डाडाधार गया था। बृहस्पतिवार अपरान्ह को जब वह लौटने लगा तो मार्ग पर पड़ने वाले एक नाले के ऊपर आवागमन के लिए बनाई गई लकड़ी की पुलिया में वाहन का पिछला टायर हवा में लटक गया।

दो बार्डर रोड समेत छह सड़कें बंद
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में दो बार्डर रोड समेत ग्रामीण क्षेत्र की छह सड़कों पर यातायात अब तक सुचारु नहीं हो पाया है। बार्डर रोड पर घटियाबगड़-जिप्ती और न्यू सोबला-तिदांग-नागलिंग सड़क नागलिंग के पास बंद है। ग्रामीण क्षेत्र में डीडीहाट-आदिचौरा, गिनीबैंड-समकोट, नाचनी-भैंसकोट, नाचनी-बांसबगड़, सानदेव-नानपापो और सेराघाट-दानीबगड़ सड़कें बंद हैं।

खिली धूप तो मिली राहत
पिथौरागढ़। पिछले कई दिनों के बाद बृहस्पतिवार को सुबह से ही चटख धूप खिलने से लोगों को राहत मिली। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से सब्जियों को खासा नुकसान हुआ है। बेल वाली सब्जियां तो अधिकतर जगहों पर सड़ गई हैं। बावजूद इसके अभी कद्दू, ककड़ी आदि की बेल सुरक्षित बची हैं। किसानों को उम्मीद है कि अब धूप खिलने के बाद बेलों को पुन: संजीवनी मिलेगी।

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