दारमा घाटी में नल से निकलने वाला पानी बर्फ में हुआ तब्दील। संवाद
धारचूला (पिथौरागढ़)। 10,000 से 14,500 फुट की ऊंचाई पर दारमा और व्यास घाटियों में तापमान माइनस सात डिग्री तक पहुंचने लगा है। ऐसे में यहां प्राकृतिक जल स्रोतों के साथ ही नलों में पानी जमने से जल संकट गहरा गया है। ग्रामीण नलों को गर्म कर पानी का इंतजाम कर रहे हैं। कड़ाके की ठंड पड़ने से दुश्वारियां बढ़ने से ग्रामीणों का निचली घाटियों में लौटना शुरू हो गया है।
चीन सीमा से सटे दारमा और व्यास घाटी के गांवों में सुबह-शाम बर्फीली हवाएं चलने से तापमान में गिरावट आ गई है। हालात यह हैं कि प्राकृतिक जल स्रोतों और नलों में पानी जमने लगा है। जल स्रोतों का पानी बर्फ में तब्दील होने से क्षेत्र के लोगों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। ग्रामीण बर्फ पिघलाकर पानी की व्यवस्था करने के लिए मजबूर हैं।
आदि कैलाश विकास समिति के अध्यक्ष पुनीत सिंह कुटियाल ने बताया कि सुबह और शाम यहां के गांवों में तापमान माइनस सात डिग्री तक पहुंच रहा है। ठंड काफी बढ़ गई है और बर्फबारी की संभावना को देखते हुए कुटी के 30 से अधिक परिवार निचली घाटियों में लौट चुके हैं। एक सप्ताह के भीतर आदि कैलाश और कुटी गांव के अन्य परिवार भी निचली घाटियों में लौट जाएंगे।
दारमा घाटी के दांतू से भी 14 गांव होने लगे खाली
दारमा घाटी के दांतू के पूर्व प्रधान जमन सिंह दताल ने बताया कि ठंड काफी बढ़ गई है। ऐसे में अब हिमालयी क्षेत्र के गांवों में रहना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि अगले कुछ दिन में दारमा घाटी के 14 गांवों के ग्रामीण भी निचली घाटियों में लौट जाएंगे। ऐसे में ये गांव अगले कुछ महीनों के लिए फिर से वीरान हो जाएंगे।