जिले के सभी हिस्सों में बुधवार को मध्यम स्तर की बारिश से तापमान सात डिग्री तक लुढ़क गया है। जिला मुख्यालय में बुधवार का अधिकतम तापमान 22 डिग्री रहा। यह मंगलवार की तुलना में सात डिग्री कम है। मुनस्यारी में लगातार पांच दिनों से हो रही बारिश के कारण न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मुनस्यारी में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। मुनस्यारी के पास पंचाचूली, हंसलिंग, राजरंभा, छिपलाकेदार, खलियाटॉप, कालामुनि में बुधवार सुबह हिमपात हुआ। घाटी वाले इलाकों में बारिश से गर्मी का असर समाप्त हो गया है।
मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि बृहस्पतिवार को भी हल्की और मध्यम स्तर की बारिश होगी। चोटियों पर हिमपात का क्रम जारी रहेगा। कुछ हिस्सों में गरज वाले बादल भी सक्रिय होंगे। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी डा. आरएस राणा ने बताया कि जिले के सभी इलाकों में हल्की और मध्यम स्तर की बारिश हो रही है। डीडीहाट, अस्कोट, थल, बेड़ीनाग में दिनभर रिमझिम बारिश से मौसम सुहावना हो गया है। ठीक प्रचंड गर्मी की शुरुआत से पहले हुई इस बारिश ने लोगों को काफी राहत दी है।
सबसे बड़ी राहत वन विभाग को मिली
पिथौरागढ़। ताजा बारिश से सबसे बड़ी राहत वन विभाग को मिली है। गर्मी पड़ने से जिले के कई जंगलों में आग का खतरा बढ़ने लगा था और कुछ जंगलों में पिछले दिनों आग लगी थी। वन रेंजर दिनेश चंद्र जोशी ने बताया कि बारिश की नमी का असर कम से कम एक सप्ताह तक बना रहेगा। तब तक जंगलों में आग की आशंका नहीं रहेगी। अलबत्ता वन विभाग के कर्मचारी क्रू-स्टेशनों पर लगातार ड्यूटी दे रहे हैं। 15 जून तक क्रू-स्टेशन खुले रहेंगे।
फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका
पिथौरागढ़। जिले के घाटी वाले इलाकों में गेहूं, मसूर, जौ की फसल अब पकने वाली है। ताजा बारिश से पकी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. आरके सिंह ने बताया कि तेज बारिश आने और अंधड़ चलने से फसलों के दाने गिरने लगते हैं। इससे नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि बारिश से सब्जियों का फायदा मिलेगा। सब्जियों को सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसान नए सब्जी पौधों और बीजों का रोपण भी कर सकते हैं।
पेयजल संकट से राहत मिलेगी
पिथौरागढ़। यदि अगले दो दिनों में अनुमान के मुताबिक बारिश हो जाती है तो पेयजल संकट से थोड़ी राहत मिल जाएगी। बारिश का पानी नदियों और नालों में पहुंचने से उनको जीवनदान मिल रहा है। अधिकांश पेयजल योजनाएं नदियों और छोटी नदियों से ही बनी हैं। यह बात अलग है कि इस मौसम की बारिश से प्राकृतिक स्रोत रिचार्ज नहीं होते, लेकिन स्रोतों के सूखने का खतरा कम हो जाएगा। इसके अलावा लोगों को सिंचाई के लिए पेयजल का उपयोग नहीं करना पड़ेगा।