पिथौरागढ़। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए घोषित लॉकडाउन का असर उतराखंड की प्रसिद्ध लोकपरंपरा ‘भेटौली’ पर भी पड़ा है। प्रति वर्ष ठीक इन्हीं दिनों चलने वाली यह लोक परम्परा इस वर्ष कोरोना वायरस की भेंट चढ़ गई। गांव-घरों में अनेक बहू-बेटियों के मायके से भेटौली नहीं आ पाने की वजह से वह निराश हैं। यह देखते हुए राजकीय शिक्षक संघ ने जन-सहयोग मुहिम के तहत अस्कोट-गर्खा क्षेत्र में गरीब एवं निर्धन परिवारों बहू-बेटियों को अपनी तरफ से भेटोला दिया जा रहा है।
राजकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष गोविंद भंडारी के नेतृत्व में शिक्षकों ने क्षेत्र के खोलियागांव, देवल, हिनकोट, चमलेख, गदाली, गिरपाटा, बड़ीगांव आदि गांवों के ऐसे करीब दो दर्जन परिवारों की बहू-बेटियों को आटा, चावल, दाल, तेल, नमक व मसाले के साथ ही एक-एक मिठाई का पैकेट भी भेंट किया। मुहिम के तहत संगठन की राइंका सिंगाली विद्यालयी शाखा के अध्यक्ष आन सिंह खोलिया के नेतृत्व में ओगला के 22 परिवारों को खाद्यान बांटा गया। शिक्षक संघ की इस पहल में हरीश पाल, एनडी पंत, लक्ष्मण प्रसाद, योगेंद्र निर्मल, पूरन पंत, गोविंद खड़ायत, चारु पंत, नीरज पंत, रोशन डिमरी, गोपाल खोलिया,रवि लुंठी, महेंद्र पाल आदि ने सहयोग दिया।
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भैटोली उतराखंड की समृद्धशाली लोक परंपरा रही है। हर वर्ष इन दिनों बहू-बेटियों को मायके से आने वाले भेटौली का बेसब्री से इंतजार रहता था, लेकिन इस बार कोरोना के चलते अनेक परिवारों में भेटोला न पहुंच पाने से वह निराश हैं। यदि हमारी इस पहल से इनकी निराशा कुछ हद तक भी कम होती है तो ये हमारे लिये संतोष की बात होगी। शिक्षक समुदाय इस कठिन समय में हर प्रकार से समाज के साथ खड़ा है। - गोविंद भंडारी(जिलाध्यक्ष), राजकीय शिक्षक संघ, पिथौरागढ़।
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