स्कूलों के कोटिकरण को लेकर अपनाई गई प्रक्रिया से शिक्षकों में भारी गुस्सा है। निदेशालय स्तर पर कोटिकरण की जो सूची जारी हुई है। उससे भी शिक्षक नाखुश हैं। शिक्षकों ने कोटिकरण के वर्तमान निर्धारण को रद्द करने की मांग की है। राजकीय शिक्षक संघ ने आज जिलाधिकारी को इस संबंध में ज्ञापन दिया और कोटिकरण के नाम पर हुई विसंगतियों के कई उदाहरण पेश किए। डीएम सुशील कुमार ने मुख्य शिक्षा अधिकारी से कहा है कि शिक्षकों की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर गौर करें।
राजकीय शिक्षक संघ गौरंगचौड़ शाखा के मंत्री राजेश मोहन उप्रेती ने अपने विद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा है कि गोरंगचौड़ को इस बार के कोटिकरण में सुगम दिखा दिया गया है।
जबकि यह स्कूल जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर की दूरी पर है। वहां जाने के लिए दो किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है। गोरंगचौड़ में संचार की कोई सुविधा नहीं है। 25 वर्षों से विद्यालय में नए भवन का निर्माण नहीं हुआ है। अब यह मामला शनिवार को जिले के दौरे पर आ रहे मुख्यमंत्री के सामने भी उठाया जाएगा। इधर, शिक्षक संगठनों का कहना है कि 11 जून को कोटिकरण की जो सूची जारी की गई है उसके अनुसार जिला मुख्यालय में स्थित जीजीआईसी, जीआईसी गुरना, ऐंचोली, थरकोट, कनालीछीना, बजेटी को दुर्गम की श्रेणी में रख दिया गया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि राजनैतिक लोग अपने चहेतों को फायदा दिलाने के लिए यह कदम उठा रहे हैं।