गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। गुच्छी मशरूम (मोरेल मशरूम) को दुनिया की सबसे महंगी और दुर्लभ प्रजाति में से एक माना जाता है। यह जंगलों में पाया जाता है। इसे घर में उगाने का प्रयोग किया गया जो सफल रहा है।
गुच्छी मशरूम स्वाद में बेहतरीन और पौष्टिक तत्वों से भरपूर है। इसमें विटामिन डी, वसा, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। इसमें कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। यह मुख्य रूप से जम्मू कश्मीर, हिमाचल, कुल्लू, शिमला और उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगता है। इसकी खेती नहीं की जाती है। जंगलों के अंधाधुंध कटान के कारण अब यह बहुत कम मिलता है।
कुमाऊं विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग से सेवानिवृत्त डॉ. जीएस मेर के मार्गदर्शन में चौढियार निवासी शिक्षक भगवत जोशी ने गंगोलीहाट क्षेत्र में गुच्छी मशरूम का घरेलू स्तर पर उत्पादन करने का नया प्रयोग शुरू किया जो सफल रहा है। उन्होंने बताया कि कई प्रयोगों और चुनौतियों के बाद इसके उत्पादन में सफलता मिली है।
जोशी कृषि और बागवानी में नए-नए प्रयोग करते रहते हैं। विद्यालय से आने के बाद वह बचे समय को अपने शौक को पूरा करने में लगाते हैं। उनके प्रयोग युवाओं के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत रहे हैं। उन्होंने बताया कि गुच्छी मशरूम (मोरेल मशरूम) दुनिया की सबसे महंगी और दुर्लभ प्रजाति में से एक है। उन्होंने बताया कि इसका घरेलू उत्पादन बड़ी उपलब्धि है।