बरसात के मौसम में रेत निकासी प्रतिबंध होने के बावजूद खनन कारोबारियों का खेल जारी है। टनकपुर के रवन्नों से जिला मुख्यालय में रात के अंधेरे में रेत पहुंचाई जा रही है, साथ ही जिले में कई जगहों पर अवैध रेत निकासी कर सरकार को राजस्व का चूना भी लगाया जा रहा है। उप जिलाधिकारी की जांच में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। उन्होंने रेत ढोने वाले 15 वाहन मालिकों को नोटिस जारी करके पूछा है कि आखिर रेत कहां से आ रही है। उधर, नोटिस मिलने के बाद से रेत के अवैध खेल से जुड़े लोगों में घबराहट साफ नजर आ रही है। कोई कुछ इस बारे में बोलने को तैयार नहीं है।
सीमांत जिले में काफी समय से रेत से जुड़े कई कारोबारी टनकपुर के रवन्नों से यहां रेत ला रहे हैं। बताया जाता है कि यह रेत रात के अंधेरे में यहां लाई जा रही है। रेत ढोने वाले वाहन घाट चौकी से आगे कहीं दर्ज नहीं हैं। घाट चौकी में भी यह दर्ज नहीं हैं, ऐसे में पहला सवाल यह है कि रेत आखिर आ कहां से रही है। दूसरा सवाल जहां से रेत निकाली जा रही है, क्या वहां के राजस्व निरीक्षकों को इस बारे में कुछ भी पता नहीं है। सूत्रों की माने तो रेत पंथड़ा, राड़ीखूटी से अवैध निकासी करके ढोई जा रही है। इस मामले की अपने स्तर से जांच करने वाले एसडीएम तुषार सैनी ने बताया कि टनकपुर के रवन्नों से आ रहे रेत वाहनों की ऐंचोली, घाट चौकी में जांच की गई।
वाहन ऐंचोली में दर्ज है, लेकिन घाट चौकी में दर्ज नहीं हैं। एसडीएम ने बताया कि 15 वाहन मालिकों को नोटिस जारी किया गया है। जिला मुख्यालय में इस समय एक टिप्पर रेत 20 से 25 हजार रुपये में बेची जा रही है। एसडीएम की कार्रवाई के बाद भी इस गैरकानूनी खेल पर लगाम नहीं लगी है, अब रेत देर रात ढोई जा रही है। इस खेल में कई लोगों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता है।