अस्कोट (पिथौरागढ़)। पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमांत जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना को खुद सिस्टम पलीता लगा रहा है। अस्कोट में वीरान पड़ा खंडहर में तब्दील होता साहसिक खेल प्रेमियों और पर्यटकों की सुविधा के लिए बनाया गया छात्रावास इसका प्रमाण है।
वर्ष 2001 में पर्यटन विभाग की ओर से क्षेत्र के खोलिया गांव में पांच नाली भूमि पर एक करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि से छात्रावास भवन बनाया गया। इसका उद्देश्य साहसिक खेल प्रेमियों और पर्यटकों को ठहराकर क्षेत्र में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने का था। जंगल के बीच भवन तो बना दिया लेकिन यहां तक सड़क के साथ ही साहसिक पर्यटकों को पहुंचाने में सिस्टम नाकाम रहा।
हैरत की बात है कि पर्यटकों और साहसिक खेल प्रेमियों के न पहुंचने से इसका संचालन एक दिन भी नहीं हो सका। पर्यटन विभाग ने भी इस पर ताला लगाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। नतीजतन वीरान पड़ा यह छात्रावास खंडहर बनता जा रहा है जो सिस्टम पर कई तरह के सवाल भी खड़े कर रहा है।
पर्यटक बढ़े लेकिन ताले खोलने वाला कोई नहीं
पर्यटन विभाग का कहना है कि 25 साल पहले सीमांत जिले में साहसिक पर्यटन गतिविधियां बेहद कम थीं। साहसिक खेल प्रेमी और साहसिक पर्यटकों की संख्या कम होने से इस छात्रावास का संचालन शुरू नहीं हो सका। हैरानी है कि वर्तमान में आए दिन पर्यटन विभाग रिवर राफ्टिंग, पर्वतारोहण, ट्रैकिंग सहित अन्य साहसिक खेल का आयोजन कर रहा है। पर्यटक और पर्यटन गतिविधियां बढ़ने के बाद भी इस छात्रावास का ताला खोलने वाला कोई नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि महज धन की बर्बादी के लिए भवन बना दिया गया। यदि यह भवन अपने उद्देश्य को पूरा करता तो इससे सीमांत जिले में पर्यटन गतिविधियां बढ़तीं जिससे रोजगार के अवसर भी पैदा होते।
पीपीपी मोड पर चलाने की योजना भी फेल
हाल के वर्षों में सीमांत जिले में साहसिक और अन्य पर्यटकों की संख्या में खासा उछाल आया है। पर्यटन विभाग को खुद इस बात का अंदाजा है, इसके बाद छात्रावास के संचालन के लिए गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। अब पर्यटन विभाग इस छात्रावास को पीपीपी मोड पर संचालित करने की बात कर मामले पर पर्दा डाल रहा है। पीपीपी मोड पर छात्रावास को देने के लिए पूर्व में तीन बार टेंडर निकाले गए लेकिन एक बार भी खंडहर हो चुके छात्रावास का ताला खोलने वाला नहीं मिला। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि पर्यटन विभाग की छात्रावास को पीपीपी मोड पर चलाने की योजना भी फेल साबित हुई है।
कोट
अस्कोट में साहसिक पर्यटकों के ठहरने के लिए छात्रावास बनाया गया था। तब सीमित संख्या में पर्यटकों के पहुंचने से इसका संचालन शुरू नहीं हो सका। अब इसे पीपीपी मोड पर संचालित करने की योजना है। - कीर्ति चंद्र आर्या, जिला पर्यटन अधिकारी, पिथौरागढ़