डीडीहाट (पिथौरागढ़)। सीएचसी डीडीहाट में कार्यरत तीन एमबीबीएस चिकित्सकों में से एक लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। अब अस्पताल में तैनात दो महिला चिकित्सकों पर एक लाख से अधिक की आबादी के इलाज का जिम्मा आ गया है। वहीं जिस तरीके से कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में अस्पताल कोरोना से लड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
डीडीहाट के सीएचसी में आठ एमबीबीएस चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। उसमें से तीन चिकित्सक ही लंबे समय से मरीजों का इलाज कर रहे थे लेकिन उसमें भी पुरुष चिकित्सक लंबे अवकाश पर चले गए हैं। ऐसे में अस्पताल में दो महिला चिकित्सक ही बची हैं। इन महिला चिकित्सकों को ओपीडी के अलावा गर्भवतियाें के प्रसव का काम भी देखना पड़ रहा है।
व्यवस्था बनाने के लिए बीडीएमएस डॉ. बीएस मेहरा भी ओपीडी देख रहे हैं। वर्तमान में रोजाना इस अस्पताल में 80 से 90 मरीज अपना इलाज कराने पहुंच रहे हैं। इसके अलावा रात के समय चार से पांच इमरजेंसी के केस अस्पताल में आ रहे हैं।
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चिकित्सकों की कमी से विभाग लगातार जूझ रहा है। डीडीहाट सीएचसी में चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए लगातार स्वास्थ्य विभाग देहरादून से पत्राचार किया जा रहा है। जैसे ही चिकित्सकों की नियुक्ति पिथौरागढ़ में होगी, सबसे पहले डीडीहाट सीएचसी में चिकित्सक भेजे जाएंगे। - डॉ. एचएस ह्यांकी, मुख्य चिकित्साधिकारी, पिथौरागढ़।
विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती की मांग के लिए प्रदर्शन
लोहाघाट (चंपावत)। उप जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरने की मांग मुखर होने लगी है। मंगलवार को नगर पालिका के निवर्तमान सभासद राजकिशोर साह, भुवन बहादुर और दीपक साह के नेतृत्व में लोगों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने जल्द मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
आक्रोशित लोगों का कहना था कि लंबे समय से अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ आदि पद रिक्त चल रहे हैं। अससे मरीजों को स्थानीय स्तर पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। मरीजों को जिला मुख्यालय, हल्द्वानी, बरेली आदि स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
लोगों ने कहा कि चंपावत जिले का सबसे अधिक ओपीडी वाला अस्पताल सरकार और स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते मात्र रेफर सेंटर बनकर रह गया है। गुस्साए लोगों ने जल्द विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती न करने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। प्रदर्शन करने वालों में नारायण सिंह, लवी कुमार, सदभ चौधरी, केके पांडेय, सुंदर लुंठी, जावेद यार खां, माधवी देवी, सतलेश देवी, कमला देवी, सरिता देवी, कमला देवी आदि मौजूद रहीं।
14 हजार की आबादी के लिए बना आयुर्वेदिक अस्पताल चिकित्सक विहीन
नाचनी (पिथौरागढ़)। नाचनी न्याय पंचायत के 14 गांवों की 12 हजार आबादी के लिए बने दो आयुर्वेदिक अस्पताल लंबे समय से चिकित्सक विहीन है। दोनों अस्पताल लंबे समय से फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहे हैं।
नाचनी आयुर्वेदिक चिकित्सालय एक वर्ष से और खतेड़ा में 12 वर्षों से चिकित्सक नहीं है। दोनों अस्पताल फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहे हैं। चिकित्सक नहीं होने से मरीजों को मजबूरी में ऐलोपैथिक इलाज करना पड़ रहा है। भैंसकोट निवासी भवान सिंह महर का कहना है कि दोनों अस्पतालों में बासनी, मल्ला भैंसकोट, चामी भैसकोट, गट घोरगाड़ी, बाथीं, कोट्यूड़ा, हुपुली, भैसखाल, धामी फल्याटी, रिंगुनिया, नापड़, खतेड़ा और सीणी के ग्रामीण निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चिकित्सकों की नियुक्ति की मांग की जा रही है। इसके बाद भी नियुक्ति को लेकर कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। चिकित्सक नहीं होने से लोगों को जांच के लिए तेजम अस्पताल जाना पड़ता है। संवाद
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जिले के आधे से ज्यादा चिकित्सालय चिकित्सक विहीन है। शासन से ही नियुक्तियां और स्थानांतरण किए जाते हैं। चिकित्सक विहीन अस्पतालों की सूची शासन को भेजी है। - डॉ. ज्योत्सना सेमवाल, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी पिथौरागढ़।