चंपावत। रिहायशी इलाकों में घरों के नीचे दुकानों के संचालन के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छोटे जिलों में इसे लागू करने से काफी लोगों को नुकसान होगा। चंपावत जैसे छोटे जिलों में बड़ी संख्या में मकान और दुकानें पूर्व में किसी सुनियोजित प्लान के तहत नहीं बने हैं। ऐसे में घरों के नीचे संचालित दुकानों पर रोक लगाने से लोगों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे जिलों की परिस्थितियों को देखते हुए इस तरह के मामलों में व्यावहारिक व्यवस्था और राहत दी जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए अच्छा है, लेकिन पर्वतीय और छोटे जिलों की भौगोलिक परिस्थितियां अलग हैं। यहां कई मकान और दुकानें परिस्थितियों के अनुसार बनी हैं। ऐसे में आदेश लागू करने से पहले स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उचित छूट दी जानी चाहिए।-बीसी मुरारी, अध्यक्ष, जिला बार संघ, चंपावत
सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्वागत योग्य है, लेकिन छोटे जिलों में यह आदेश उचित नहीं है। छोटे जिलों में किसी प्लान के तहत मकान और दुकानें नहीं बने हैं। ऐसे में इन जिलों में जनहित के लिए उचित नहीं है। रिहायत दी जानी चाहिए। ऐसे में लोग पलायन के लिए मजबूर होंगे और बड़े शहरों में भी दबाव पड़ेगा। -गुणानंद थ्वाल, सचिव, जिला बार संघ, चंपावत