डीडीहाट के मलयनाथ मंदिर में होली गायन करते होल्यार।
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क्षेत्र में अब खड़ी होली जोर पकड़ने लगी है। मैदानी क्षेत्रों में रोजगार कर रहे अधिकांश युवा भी पर्व के लिए गांवों में पहुंच गए हैं। इससे होली गायन में भी निखार आ गया है। होल्यार दिन में जहां खड़ी होली का आनंद उठा रहे हैं वहीं रात में बैठकी होली में मस्त हो रहे हैं। होली गीतों के साथ ही होल्यार आलू के गुटखे, अलसी, पुदीने की चटनी और लौंग की चाय की चुस्कियों का आनंद उठा रहे हैं।
सिंगाली, नरेत, बगना समेत कई गांवों में दिन में खड़ी होली की धूम मची है। होल्यार सुमिरो सीता राम भया कोई हीरा जनम ना पाओगे, इस कलयुग में दो ही वो हैं, एक माता एक पिता भया। भलो-भलो जनम लियो श्याम राधिका, भलो जनम लियो मथुरा में, गई-गई असुर तेरी नार मंदोदरी, सिया मिलन गई बागा में, विरहन तेरी मुरली घनघोरा, काहे ने पाले हरे परेवा, काहे ने पाले यो मोरा होली गीतों से धमाल मचा रहे हैं। क्षेत्र के हाट, बरमा कांडे, सिटौली, धौलेत गांवों की होली मंगलवार को सिराकोट स्थित मलयनाथ मंदिर पहुंची।
होल्यारों ने भगवान मलयनाथ को रंग-अबीर चढ़ाकर होली गायन किया। लवि कफलिया ने बताया कि घरों से बाहर रह रहे लोगों की सुरक्षा, सुख-समृद्धि के लिए मंदिर में होली गायन होता है। इस मौके पर प्रकाश बोरा, धन सिंह कफलिया, प्रेम बिष्ट, माधो सिंह, मनीष बोरा, लोकेश डसीला समेत कई होल्यार मौजूद रहे।