आप नगर के किसी भी सड़क, गली, चौराहे में निकल जाइए, आवारा जानवर आपके लिए बाधा खड़ी कर देंगे। आवारा जानवरों की संख्या कम होने के बजाए लगातार बढ़ रही है। अब तो यह जानवर बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं। गांव के लोग इस समय जंगली जानवरों से और शहर के लोग आवारा जानवरों से परेशान हैं।
पालिका ने दो साल से आवारा जानवरों से मुक्ति के लिए योजना बनाई है लेकिन अब तक यह योजना अमल में नहीं आ पाई है। आवारा जानवर रात के समय लोगों के खेतों और क्यारियों को नष्ट करते हैं और दिन के समय वह बाजार में घूमकर लोगों के सामान में मुंह मारते हैं। बताया गया है कि अकेले पिथौरागढ़ नगर में आवारा गाय और बैलों की संख्या 200 से ऊपर पहुंच गई है।
उनको कहीं पर आश्रय देने की पालिका के पास कोई व्यवस्था नहीं है। लोग जानवर के बेकार होने के बाद उसे नगर में छोड़ देते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई का साहस प्रशासन के पास भी नहीं है। इधर, पुलिस के लिए भी आवारा जानवर परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। कई बार ट्रैफिक व्यवस्था में भी आवारा जानवर बड़ा खलल डाल देते हैं। आवारा जानवर निरंतर बढ़ रहे हैं। उनकी व्यवस्था कर पाने के लिए किसी के पास संसाधन नहीं हैं।
पालिका अब जुर्माना लगाएगी
नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी खीमानंद जोशी का कहना है कि अब अपने जानवरों को नगर में छोड़ने वालों के खिलाफ पालिका सख्त कदम उठाएगी। ऐसे लोगों को चिन्हित किया जाएगा और उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नगर में इतनी बड़ी संख्या में जानवरों को रखने के लिए पालिका के पास संसाधन नहीं हैं।