पिथौरागढ़। बीडी पांडे जिला अस्पताल में पांच साल से बिना चीर फाड़ वाले पथरी के ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं। आठ से 20 एमएम की पथरी के ऑपरेशन के लिए मरीजों को निजी अस्पताल में जाना पड़ रहा है। अस्पताल में पूर्व में स्थापित लिथोट्रिप्सी मशीन खराब होने के कारण मरीज परेशान हैं।
जिला अस्पताल किडनी की छोटे आकर की पथरी के इलाज के लिए करीब तीन करोड़ की लागत से खरीदी गई लिथोट्रिप्सी मशीन पांच साल से खराब पड़ी है। मरीजों निजी चिकित्सालय में 25 हजार से अधिक की राशि खर्च कर इलाज कराने के लिए मजबूर हैं। वर्ष 2016 में लिथोट्रिप्सी मशीन स्वास्थ्य महानिदेशालय के माध्यम से स्थापित की गई थी। अत्याधुनिक तकनीक से मरीजों की किडनी में आठ से 20 एमएम वाली पत्थरी की समस्या आसानी से बिना ऑपरेशन के दूर हो जाती थी।
2019 में तकनीकी खराब के कारण बंद है मशीन
पिथैरागढ़। वर्ष 2019 में मशीन में तकनीकी खराबी के बाद से ऑपरेशन बंद हो गए थे।। जिला अस्पताल की ओर से मशीन उपलब्ध कराने वाली फर्म और स्वास्थ्य महानिदेशालय को कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन मशीन ठीक नहीं हुई। खराब मशीन सिर्फ अस्पताल में जगह घेरे हुए हैं।
कोट
लिथोट्रिप्सी मशीन में तकनीकी खराबी आई है। मशीन सप्लाई करने वाली फर्म को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं। महानिदेशालय को भी जानकारी भेजी गई है। - डॉ. एसएस नबियाल, प्रभारी पीएमएस, जिला अस्पताल पिथौरागढ़।