राज्य आंदोलनकारी और डीडीहाट जिले की मांग को लेकर सबसे पहले आंदोलन करने वाले जोध सिंह बोरा (53) का लंबी बीमारी के बाद उनके पैतृक गांव पमस्यारी में निधन हो गया। उनके निधन पर सभी राजनैतिक और गैर राजनैतिक संगठनों ने रामलीला मैदान में हुई शोकसभा में भाग लिया। उनके शोक में डीडीहाट बाजार बंद रहा। कुछ देर तक बोरा के शव को अंतिम दर्शनों के लिए रामलीला मैदान में रखा गया।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के समय कई दिनों तक जेल में बंद रहने वाले और उत्तराखंड गठन के लिए नैनीताल में आत्मदाह की कोशिश करने वाले जोध सिंह बोरा लंबे समय से बीमार थे। दो माह तक दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में इलाज कराने के बाद भी उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्हें आंतों का कैंसर हो गया था। उत्तराखंड क्रांति दल के शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी ने बोरा के पार्थिव शरीर पर यूकेडी का झंडा चढ़ाया। प्रशासन की ओर से तहसीलदार पीसी पंत, थानाध्यक्ष जीएस सामंत, डीडीहाट यूथ सोसाइटी के संजय पंत, कांग्रेस, भाजपा, बसपा, आम आदमी पार्टी, व्यापार संघ के पदाधिकारी सहित सैकड़ों की संख्या में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। वहीं व्यापारियों ने भी अपनी दुकानें बंद रखी। उनका अंतिम संस्कार थल के रामगंगा घाट में किया गया।
बोरा के निधन पर शोक की लहर
पिथौरागढ़/अस्कोट। राज्य आंदोलनकारी जोध सिंह बोरा के निधन से लोग मायूस हैं। कांग्रेस प्रदेश महामंत्री जगत सिंह खाती ने कहा कि बोरा आजीवन क्षेत्र और उत्तराखंड के हित में आवाज उठाते रहे। डीडीहाट ने एक प्रखर आंदोलनकारी खो दिया है, इसकी भरपाई संभव नहीं है। जिला अधिवक्ता संस्था के अध्यक्ष मोहन चंद्र भट्ट ने बोरा के निधन पर दुख जताया। अस्कोट में जोध सिंह बोरा के निधन पर शोक सभा का आयोजन किया गया। उक्रांद नेता वीरजंग पाल, खड़क सिंह भंडारी, उमेश पुजारी, महेश पाल, गणेश भट्ट, रवींद्र पाल ने बोरा के निधन को क्षेत्र के साथ ही उत्तराखंड के लिए गहरी क्षति बताया है।