सितंबर से बंद बरार लघु जल विद्युत परियोजना से अब उत्पादन शुरू हो गया है। फिलहाल एक ही टरबाइन चलाया गया है। उससे 375 किलोवाट बिजली पैदा हो रही है। बरार परियोजना में दो टरबाइन लगे हैं। इनमें से एक खराब पड़ा है। यदि दूसरा टरबाइन ठीक हो जाए तो यह परियोजना 750 किलोवाट बिजली पैदा करने लगेगी। पहले यह परियोजना लघु जल विद्युत निगम के पास थी।
बाद में शासन ने तीन मेगावाट से कम क्षमता वाली परियोजनाएं लघु जल विद्युत निगम के हटाकर उरेडा को दे दी। बरार परियोजना का संचालन भी उरेडा के पास आ गया लेकिन वर्ष 2014 में उरेडा ने परियोजना की देखरेख का काम शाहजहापुर के इलैक्ट्रिकल ठेकेदार को दे दिया।
ठेकेदार लक्ष्मी मित्तल ने बताया कि एक टरबाइन से 375 किलोवाट बिजली पैदा होने लगी है। दो फरवरी से उत्पादन शुरू हुआ। अब तक 19480 रुपये मूल्य की बिजली पैदा कर दी गई है। दूसरे टरबाइन की मरम्मत का काम तेजी से किया जा रहा है। बरार परियोजना से थल बाजार और स्थानीय गांवों को बिजली दी जाती है। जब तक यह परियोजना लघु जल विद्युत निगम के पास थी तब तक निरंतर उत्पादन होता था और थल घाटी के गांवों में बिजली का कोई संकट नहीं था। बार बार परियोजना के बंद हो जाने से लोगों को बिजली का संकट झेलना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी ठेकेदार के बजाए सरकारी विभागों को खुद संभालनी चाहिए। तभी इनकी देखरेख सही होगी और उत्पादन भी बढ़ेगा।