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अनुसूचित और ओबीसी वोटों पर सेंधमारी की कोशिश

Tue, 07 Feb 2017 09:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़ विधानसभा क्षेत्र के जाख कस्बे में चुनावी चर्चा में मशगूल लोग - फोटो : अमर उजाला
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पिथौरागढ़ विधानसभा सीट पर इस बार भी मुख्य लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच सिमट गई है। यूकेडी ने हालांकि मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास तो किया है, लेकिन लोगों की जुबां पर भाजपा और कांग्रेस की ही ज्यादा चर्चा है। इस सीट पर सभी दल अनुसूचित जाति और ओबीसी की वोटों पर सेंधमारी के प्रयास में हैं। इस सीट पर बगावत और भीतरघात जैसी समस्या नहीं है। मंगलवार को विधानसभा क्षेत्र के बालाकोट, जाख, पुरान, मेलडुंगरी, बुंगा, सेरी, बाराकोट, धरासी, मेलकू, चमाली, डुंगरी गांवों में जब अमर उजाला की टीम पहुंची तो भाजपा और कांग्रेस के प्रचार के लिए महिलाओं की टोलियां निकल रही थी। प्रचार के दौरान यह लोग कम से कम प्रत्याशी का चुनाव चिन्ह और प्रत्याशी का फोटो लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे थे।
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जाख में दोपहर 12 बजे लोगों की चौपाल लगी थी। इस छोटे से कस्बे में चुनावी गतिविधियां कुछ ज्यादा दिखी। लोग अलग-अलग खेमों में बंटे दिखे। भाजपा, कांग्रेस के समर्थक तो इनमें हैं ही, साथ ही कुछ लोग यूकेडी की और कुछ लोग निर्दलीय महेंद्र चमाली की बात भी कर रहे थे। चमाली इसी क्षेत्र के चमाली गांव के निवासी हैं। वह दोनों दलों के वोट बैंक को कम से कम अपने इलाके में तो प्रभावित कर ही देंगे। प्रचार का वाहन भी सिर्फ महेंद्र सिंह का ही इलाके में घूमता दिखाई दिया।

लोदियागैर में 100 प्रतिशत एससी वोटर हैं। जाख में ब्राह्मण, ठाकुर और ओबीसी (गिरी) लोगों का प्रतिशत बराबर 25-25 है। इस गांव में भी 25 फीसदी एससी वोटर हैं। जाख ऐसा गांव है जहां पर हर जाति के लोग रहते हैं। पुरान में एससी की संख्या करीब 50 फीसदी है। मेलडुंगरी में भी यही स्थिति है। रामगंगा के किनारे स्थित खड़कूभल्या गांव में भी एससी की संख्या 40 प्रतिशत के करीब है। मुख्य दावेदारों के साथ-साथ अन्य दावेदार इस बार अनुसूचित जाति के वोटों पर सेंधमारी की कोशिश में हैं।
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गांवों में चुनाव का माहौल तो है, लेकिन कोई ऐसा मुद्दा सुनाई नहीं दिया, जिससे वोट को प्रभावित किया जा सके। लोग अपने काम-धंधों में हमेशा की तरह व्यस्त दिखे। सुबह, दोपहर और शाम को कुछ राजनीतिक समझ रखने वाले लोग अखबार देखकर राजनीतिक धारणा और अनुमानों पर चर्चा करने लग जाते हैं। अब मतदान की तारीख नजदीक आ रही है तो लोग अपने स्तर से ठोस आकलन भी करने लगे हैं। यह बात अलग है कि ब्राह्मण और ठाकुर मतदाताओं में किसी एक दल के प्रति एका नहीं है। वह अपनी-अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धताओं के कारण बंटे हैं। इतना जरूर है कि अब लोग अपना मन बना चुके हैं और वह कम से कम वोटिंग तक तो पलटने वाले नहीं हैं। पिछले चुनावों के समय भी करीब-करीब ऐसी ही स्थितियां देखने को मिली थी। जाख में एक दुकान के सामने बैठे लोगों के विचारों से यही कुछ निष्कर्ष निकला।

चुनाव में बड़ा मुद्दा कोई नहीं
जाख निवासी डा. कीर्तिबल्लभ भट्ट का कहना है कि इस चुनाव में कोई बड़ा मुद्दा सामने नहीं आया है। लोग अपनी समस्याओं को एक प्रकार से भूल से गए हैं। यह बात अलग है कि लोगों की विकास को लेकर अपेक्षा भी है। इस बार का चुनाव अलग तरीके का हो गया है, इसमें कोई लहर नहीं है।

लोगों की समझदारी ज्यादा बढ़ी है
स्थानीय निवासी प्रकाश भट्ट का कहना है कि चुनाव को लेकर लोगों की समझदारी बढ़ी है। वह अब भावुकता में नहीं आते। चुनाव में चाहे बड़ा मुद्दा कोई न हो, लेकिन लोगों की क्षेत्र के लिए कुछ जरूरतें तो होती ही हैं। वह तो यहां तक कहते हैं कि इस बार का चुनाव लोगों के विवेक पर आधारित होगा। 

लोगों की धारणा बदलना संभव नहीं
व्यापारी मदन भट्ट का नजरिया थोड़ा अलग है। वह कहते हैं कि क्षेत्रीय विकास का मुद्दा कभी समाप्त नहीं हो सकता। अब गांवों में शिक्षा का प्रसार हो चुका है। हर व्यक्ति समाचारपत्रों, टीवी की खबरों को जरूर देखता है। लोगों की धारणा बदलने वाली बात बहुत जल्दी संभव नहीं है।
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