पिथौरागढ़। मड़धूरा में 14.19 करोड़ रुपये की लागत से बने नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज के निर्माण को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। भू-वैज्ञानिक के सर्वे के दौरान दिए गए सुझाव का पालन नहीं किया गया। अगर सुझावों को कार्यदायी संस्था मानती तो आज करोड़ों से बनी बिल्डिंग बर्बाद नहीं होती।
पिथौरागढ़ के मड़धूरा में तकनीकि शिक्षा विभाग को भूमि दी गई थी। इसमें से छह हेक्टेयर भूमि को निर्माण के लिए चिह्नित किया गया था। जिस स्थान पर जगह चिह्नित की गई वह ढालदार भूमि थी। भू-वैज्ञानिकों की रिपोर्ट में कहा गया था कि जिस स्थान पर निर्माण किया जाना है वहां बरसाती नाले से सुरक्षात्मक कार्य करने जरूरी हैं।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि निर्माण वाले स्थान की भार क्षमता की जांच करना आवश्यक है। निर्माण कार्य बरसाती नालों से पांच से 10 मीटर की दूरी पर करना जरूरी होगा। निर्माणाधीन स्थल पर मजबूत सुरक्षा दीवारों का निर्माण करना भी आवश्यक बताया गया है।
तत्कालीन सीडीओ को जांच में मिली थीं कई खामियां
पिथौरागढ़। इंजीनियरिंग कॉलेज के निर्माण की जांच के लिए तत्कालीन डीएम डॉ. आशीष चौहान ने तत्कालीन अनुराधा पाल को जांच अधिकारी बनाया था। जांच के दौरान पता चला कि निर्माण के दौरान भू-वैज्ञानिकों के सुझाव नहीं माने गए। निर्माण कार्य में अच्छी गुणवत्ता का प्रयोग भी नहीं किया गया है। इस संबंध में तत्कालीन सीडीओ ने इस मामले की वृहद जांच के लिए डीएम को पत्र लिखा था लेकिन शायद उस पर कोई अमल नहीं किया गया होगा जिस कारण आज यहां बनी बिल्डिंग भू धंसाव की चपेट में है और परिसर के चारों ओर भूस्खलन हो रहा है। संवाद
सुरक्षा दीवार के बगैर बनाया गया ए-ब्लाॅक
पिथौरागढ़। मड़धूरा में इंजीनियरिंग कॉलेज के ए-ब्लाॅक का निर्माण कार्य बिना सुरक्षा दीवार लगाए कर दिया गया है। इस कारण पीछे के हिस्से से लगातार भू-कटाव हुआ और कमरों तक मलबा घुस गया। इसके अलावा बरसाती नाले से आने वाले नालाें से होने वाले नुकसान को बचाने के लिए भी कोई कार्य नहीं किए गए। संवाद
पहले फूंक दिए करोड़ों अब नया भवन बनाने के लिए भेजा है प्रस्ताव
पिथौरागढ़। वर्तमान में सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज का संचालन जीआईसी में किया जा रहा है। यहां शिक्षा विभाग की कुछ भूमि को इंजीनियरिंग कॉलेज के नाम करने के लिए जिला प्रशासन ने प्रयास किया था लेकिन अभिभावकों के विरोध के बाद यह कार्य नहीं हो पाया। वर्तमान में यहां छह ट्रेड संचालित किए जा रहे हैं जिसमें 305 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। यहां मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल, कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन ट्रेड संचालित किया जा रहा है। संवाद
कोट
भवन की सुरक्षा के लिए कार्य कर किसी अन्य विभाग इसे दिया जाएगा। जिस समय निर्माण कार्य हुए उस समय कार्यदायी संस्था और इंजीनियरिंग कॉलेज प्रबंधन ने ध्यान रखना चाहिए था। - डॉ. शिव प्रसाद बरनवाल, अपर जिलाधिकारी पिथौरागढ़।