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उच्च हिमालयी क्षेत्रों के गांव बर्फ से लदकद

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पिथौरागढ़। उच्च हिमालयी क्षेत्रों के गांव बर्फ से लकदक हो गए हैं। इन गांवों में पांच से सात फुट तक बर्फ गिरी है। यहां तापमान सामान्य से 10 डिग्री नीचे चला गया है। बर्फबारी के चलते सीमा पर ग्रामीणों को जहां परेशानी हो रही है, वहीं भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के जवान विपरीत परिस्थितियों में सीमा की लगातार गश्त कर रहे हैं।
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सीमांत क्षेत्र धारचूला के चीन सीमा से लगे दारमा, व्यास और चौदास घाटी के गांव बर्फ से लकदक हैं। दारमा घाटी के गांव सेला, चल, नागलिंग, बालिंग, बौन, फिलम, व्यास घाटी के बूंदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, गुंजी, नाभी, रोंकांग, कुटी गांव में भी भारी बर्फबारी हुई है। यहां पांच से छह फुट बर्फ पड़ी है। इस बार सीमा पर सेना की आवाजाही बढ़ने से इन गांवों में काफी रौनक है। अमूमन हर साल सर्दी से पहले यहां गांव के लोग नीचे माइग्रेशन में चले जाते थे, लेकिन इस बार ये लोग यहीं हैं। आपात स्थिति में इन गांवों के लोगों को आईटीबीपी, भारतीय सेना, बीआरओ और एसएसबी के जवान मदद कर रहे हैं। बर्फबारी के शुरू होने से पूर्व ही इन गांवों में छह माह का खाद्यान्न भेज दिया गया है। बर्फबारी के कारण ग्रामीणों को लकड़ी आदि की व्यवस्था करने में परेशानी हो रही है।
बर्फबारी के कारण जमी पेयजल लाइनें
पिथौरागढ़। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के कारण पेयजल लाइनें जम गईं हैं। ग्रामीण बर्फ पिघलाकर पानी का प्रबंध कर रहे हैं। साथ ही सीमा पर तैनात जवान भी बर्फ पिघलाकर प्यास बुझा रहे हैं।
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निचले इलाकों में पाले ने बढ़ाईं मुश्किलें
पिथौरागढ़। निचले क्षेत्रों में लंबे समय से बारिश नहीं हुई है। इस कारण फसलें और बागवानी को काफी नुकसान हुआ है। रात में मौसम के साफ रहने से चंडाक, नैनीपातल, वड्डा, कनालीछीना और सतगढ़ में पाला पड़ रहा है। इसके बाद भी लोनिवि और बीआरओ पाला संभावित क्षेत्रों में चूने और नमक का छिड़काव नहीं कर रहे हैं। इस कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। रही हैं।
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