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कम हिमपात से यात्रा पड़ावों को नुकसान नहीं

Fri, 22 Apr 2016 10:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
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कैलास मानसरोवर यात्रा - फोटो : अमर उजाला
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कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग का जायजा लेने गई कुमाऊं मंडल विकास निगम की टीम शुक्रवार को गुंजी से आगे रवाना हो गई है। यह टीम नाभीढांग तक जाएगी। उसके बाद छोटा कैलास यात्रा मार्ग पर ज्योलिंगकांग तक भी टीम के जाने का कार्यक्रम है। टीम की ओर से मुख्यालय को जो रिपोर्ट भेजी गई है उसके अनुसार इस बार यात्रा पड़ावों को कई नुकसान नहीं पहुंचा है। इस बार उच्च हिमालयी क्षेत्र में कम हिमपात हुआ था।
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केएमवीएन के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने बताया कि जून में शुरू होने वाली यात्रा की तैयारी के लिए निगम की रैकी टीम भेजी है। टीम में दो अवर अभियंता, पानी की लाइन ठीक करने वाले प्लंबर, बिजली ठीक करने के लिए इलैक्ट्रीशियन को भेजा गया है। उन्होंने बताया कि अब तक जो रिपोर्ट मिली है उसके अनुसार हर पड़ाव में ज्यादा नुकसान नहीं है। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले साल कालापानी के पास एवलांच आने से रास्ते को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन इस बार रास्तों को भी ज्यादा नुकसान नहीं है। कुछ स्थानों पर थोड़ी मरम्मत की जरूरत रहेगी। ऐसा हर साल ही करना पड़ता है। मर्तोलिया ने बताया कि कैलास यात्रा पर इस बार भी 18 दल जाएंगे। रास्ते और पड़ावों का जायजा लेने गई टीम एक हफ्ते में लौटेगी। उसकी पूरी रिपोर्ट के आधार पर ही अगली तैयारी की जाएगी।

पाल राजवंश की सामग्री की प्रदर्शनी लगेगी
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। आईटीबीपी सातवीं वाहिनी मुख्यालय में इस बार भी अस्कोट के पाल राजवंश की प्राचीन सामग्री कैलास यात्रियों के दर्शनार्थ रखी जाएगी। पाल राजवंश के वर्तमान वारिस कुंवर भानुराज पाल इस सामग्री को लेकर यात्रा शुरू होने से ठीक पहले मिर्थी पहुंच जाएंगे। पाल ने बताया कि कैलास यात्रा पर जाने वाले सभी यात्रियों को इस सामग्री के बारे में बताया जाएगा। वह कई वर्षों से यह प्रदर्शनी लगा रहे हैं।
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नारायणआश्रम से बूंदी तक हाइरिस्क जोन
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग पर नारायणआश्रम से बूंदी तक करीब 24 किलोमीटर के रास्ते को हाइरिस्क जोन घोषित किया गया है। इस स्थान पर आईटीबीपी की डिजास्टर मैनेजमेंट टीम मौजूद रहती है, जबकि छियालेख से लिपुलेख तक के एरिया को हाई अल्टीट्यूट जोन में रखा गया है। आईटीबीपी के सेनानी केदार सिंह रावत ने बताया कि छियालेख से लिपुलेख तक डॉक्टरों की टीम यात्रियों के साथ रहेगी।
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