पिथौरागढ़। सीवर निस्तारण की उचित व्यवस्था और पानी की भरपूर सप्लाई किसी भी शहर के विकास में अहम भूमिका निभाती है। नगर निगम बनने के बाद इन सुविधाओं पर पिथौरागढ़ में फोकस किया जा रहा है। जल्द ही नगर में सीवर लाइन बिछाने का कार्य किया जाएगा। साथ ही पेयजल योजनाओं का विस्तार कर लोगों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाएगा। 425 करोड़ रुपये से यह कार्य होना है। शहरी विकास विभाग से इसके लिए हरी झंडी मिल चुकी है। यूरोपियन निवेश बैंक के सहयोग से इन योजनाओं को धरातल पर उतारा जाएगा।
नगर के सभी हिस्सों में सीवर लाइन बिछाने और यहां की एक लाख से अधिक की प्यास बुझाने वाली आंवलाघाट और घाट पंपिंग योजनाओं के विस्तार की पहल काफी समय पहले शुरू हुई थी। बाकायदा इसका रोडमैप तैयार कर डीपीआर शासन में भेजी गई। अब इस बहुप्रतिक्षित योजना को शहरी विकास विभाग की स्वीकृति मिल गई है। नगर में सीवर लाइन बिछाने और पेयजल योजनाओं के विस्तार के लिए 425 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कार्यदायी संस्था जल निगम के मुताबिक बजट मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
150 किमी से अधिक लंबी बिछेगी सीवर लाइन
जल निगम के मुताबिक अब तक नगर में सीमित क्षेत्रों में ही सीवर लाइन बिछाई गई है। अब नगर निगम अस्तित्व में आया है और इसमें शामिल 40 वार्डों का दायरा 200 किमी से अधिक है। ऐसे में कम से कम 150 किमी से ज्यादा लंबी सीवर लाइन बिछाने की योजना है। तीन से अधिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी अस्तित्व में लाए जाएंगे। सीवर लाइन बिछने से नगर के प्राकृतिक जल स्रोत भी दूषित होने से बचेंगे और बीमारी का खतरा भी कम होगा।
आंवलाघाट और घाट पेयजल योजना में लगेंगे नए पंप
नगर के लोगों की प्यास बुझाने के लिए आंवलाघाट और घाट पंपिंग योजना महत्वपूर्ण हैं। जल जीवन मिशन योजना के तहत आंवलाघाट पंपिंग योजना से कुछ नए गांव जोड़े जाने से पेयजल आपूर्ति में दिक्कत आ रही है। शहरी विकास की योजना के तहत दोनों पेयजल योजनाओं का विस्तार किया जाएगा। नए पंप लगेंगे तो नगर में पर्याप्त पानी की आपूर्ति होगी। जल निगम के मुताबिक बढ़ती आबादी के लिहाज से अगले 30 साल तक नगर में पर्याप्त पानी की आपूर्ति करना योजना का मुख्य उद्देश्य है।
कोट
सीवर लाइन बिछाने और पेयजल योजनाओं के विस्तार के लिए शहरी विकास विभाग की स्वीकृति मिल चुकी है। दोनों योजनाओं के निर्माण के बाद नगर के लोगों की पानी और सीवर की समस्या का निदान हो जाएगा। - रंजीत धर्मसक्तू, ईई, जल निगम, पिथौरागढ़