पिथौरागढ़ के सिनतोली धुरा तोक में सेब से लकदक पेड़
- फोटो : अमर उजाला
चंडाक के सिनतोली गांव का एक युवक गांव में ही अपने बगीचे को संवारने में लगा है। उसकी मेहनत अब रंग लाने लगी है। दो वर्ष पहले प्रयोग के तौर पर लगाए गए सेब के पेड़ों ने फल देना शुरू कर दिया है। युवक ने अब डेढ़ सौ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। पहले वर्ष कुछ पेड़ों से पांच किलो सेब का उत्पादन हुआ।
चंडाक के सिनतोली गांव के मनोज खड़ायत पहले पिथौरागढ़ में कंप्यूटर सर्विसिंग का काम करते थे। उनके पास धुरा तोक में जमीन है। पूर्व में इस जमीन पर सेब और अन्य फलों का बगीचा हुआ करता था। वर्तमान में बगीचे की हालत खराब थी। मनोज ने हिमाचल में अपने रिश्तेदारों के यहां सेब से लकदक पेड़ देखे तो उसे भी बगीचे में सेब का उत्पादन करने का विचार आया।
इस पर उसने दो वर्ष पहले भीमताल इंडोडच नर्सरी से विदेशी प्रजाति के रूट स्टोक के सुपर चीफ, रेड कैफ, सुपर डिलेसियस और कैमस्पर के 20 पौधे खरीदे और उन्हें बगीचे में रोपा। सेब की यह प्रजातियां पांच से छह हजार फुट की ऊंचाई पर होती हैं। यह प्रजातियां एक-दो वर्ष में ही फल देना शुरू कर देती हैं। इन पेड़ों को डंडे के सहारे की जरूरत पड़ती है। कुछ पेड़ों पर जून में फल लगे तो मनोज का हौसला बढ़ा।
मनोज ने बताया कि पहले वर्ष पांच किलो सेब का उत्पादन हुआ। एक पेड़ पहले वर्ष एक किलो और पांच वर्ष बाद 25 किलो तक फल देता है। इन प्रजातियों को यहां ठंडा मौसम पर्याप्त मिल रहा है। उन्होंने बताया कि यदि पौधे उपलब्ध हुए तो इस वर्ष जनवरी में वह सेब के 150 पौधों का रोपण करेंगे। इसके लिए बगीचे में गड्ढे तैयार कर दिए हैं। मनोज ने बताया कि यदि उन्हें औद्यानिकी के लिए प्रोत्साहन और पर्याप्त पानी मिले तो भविष्य में सिनतोली का धुरा तोक सेब की खुशबू से महकने लगेगा।
चंडाक के धुरा तोक में सेब के पेड़ों से दो वर्ष में ही अच्छा फल मिलने लग गया है। इन प्रजातियों को पहली बार किसी किसान ने लगाया है, जो सफल रहा है। उद्यान विभाग की ओर से किसान को हर संभव सहायता और सेब उत्पादन की जानकारी मुहैया कराई जाएगी।
-डॉ. मीनाक्षी जोशी, मुख्य उद्यान अधिकारी, पिथौरागढ़।