पिथौरागढ़। विधानसभा चुनाव से पहले पिथौरागढ़ कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान ने नया मोड़ ले लिया है। परिवर्तन संकल्प सम्मेलन के दौरान पिछले सप्ताह प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजूदगी में विधायक मयूख महर का सार्वजनिक विरोध करने वाले तीन नेताओं के कद पर अनुशासन की तलवार चल गई। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले हुई इस उथल-पुथल से पार्टी की मुश्किल बढ़ गई है।
महिला कांग्रेस की पूर्व जिलाध्यक्ष भावना नगरकोटी, पूर्व दायित्वधारी महेंद्र लुंठी और पीसीसी सदस्य दीपक लुंठी को छह वर्ष के लिए निष्कासित करने से कांग्रेस के सामने संतुलन साधने की चुनाैती भी बढ़ गई है। सत्ता में वापसी की उम्मीद में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजूदगी में जिले में शक्ति प्रदर्शन के नाम पर हुए परिवर्तन संकल्प सम्मेलन से आपसी दूरियां मिटाने की कोशिश की थी।
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के आग्रह पर विधायक मयूख महर सम्मेलन में शामिल हुए थे ताकि चुनावी वर्ष से पहले एकजुटता का संदेश दिया जा सके। भावना नगरकोटी ने मंच से विधायक पर खुलकर हमला बोला और पीसीसी सदस्य दीपक लुंठी व पूर्व दायित्वधारी महेंद्र लुंठी भी विरोध के स्वर में शामिल हो गए। मंच पर बढ़ते विवाद के बीच विधायक मयूख महर कार्यक्रम छोड़कर चले गए थे। संगठन ने अनुशासनहीनता पर तीनों नेताओं पर निष्कासन की कार्रवाई कर सख्त संदेश दिया है।
राजनीतिक दृष्टि से इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जो पूर्व दायित्वधारी अपने को मजबूत दिखाते हुए विधानसभा चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश करने सम्मेलन में पहुंचे वह विधायक के सामने बौने साबित हुए और पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है। इससे संगठन के भीतर यह संदेश गया है कि प्रदेश नेतृत्व ने इस विवाद में विधायक की उपस्थिति और भूमिका को प्राथमिकता दी है। संवाद
बागी तेवर के बाद भी मजबूत हुए विधायक
पिथौरागढ़ कांग्रेस का यह विवाद निकाय चुनाव के दौरान शुरू हुआ था। विधायक मयूख महर अपनी समर्थित प्रत्याशी को महापौर का टिकट दिलाना चाहते थे लेकिन पार्टी ने अंजू लुंठी को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद विधायक ने बगावत करते हुए अपनी समर्थित प्रत्याशी को निर्दलीय चुनाव मैदान में उतारा। चुनाव में न कांग्रेस जीत सकी और न ही विधायक समर्थित प्रत्याशी। इसका लाभ भाजपा को मिला और तभी से जिला कांग्रेस दो खेमों में बंट गई। परिवर्तन संकल्प सम्मेलन को इस खाई को पाटने का प्रयास माना जा रहा था लेकिन मंच पर हुए टकराव ने मतभेदों को और खुलकर सामने ला दिया। अब तीन नेताओं पर हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि बगावत के बावजूद विधायक मयूख महर का संगठन में प्रभाव बरकरार है। संवाद
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परिवर्तन संकल्प सम्मेलन में बवाल प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में हुआ। वह इसके प्रत्यक्षदर्शी हैं। उन्होंने सभी पहलुओं का आकलन किया। उनके आकलन के बाद ही पार्टी ने निर्णय लिया है इसके तहत तीन कार्यकर्ताओं को छह साल के लिए निष्कासित किया है। पार्टी का निर्णय सर्वमान्य है इसे सभी कार्यकर्ताओं को समझाना चाहिए।
-मुकेश पंत, कांग्रेस जिलाध्यक्ष, पिथौरागढ़