पिथौरागढ़। सीमांत जिले के धारचूला विकासखंड की स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जुड़ीं महिलाएं स्वयं एलईडी बल्ब बनाएंगी। महिलाओं को एलईडी बल्ब बनाने का प्रशिक्षण दे दिया गया है। महिला की ओर से बनाए गए एलईडी बल्ब और सजावटी सामान लोगों को वीएस एनर्जी ब्रांड नाम से बाजार में उपलब्ध कराएगा।
धारचूला के देहात और कालिका में एसएचजी से जुड़ीं 30 महिलाएं एलईडी बल्ब, एलईडी ट्यूब लाइट, एलईडी इनवर्टर बल्ब, एलईडी शोपीस लाइट, एलईडी झालर, डाउन बल्ब आदि बनाएंगी। शुरुआत में महिलाओं की ओर से निर्मित एलईडी लाइट वीएस एनर्जी नाम से बाजार में उपलब्ध होंगे। इसके बाद महिला समूह की ब्रांड नाम से इन लाइटों को बाजार में बेचा जाएगा।
महिलाओं को विकासखंड धारचूला में आरसेटी और वीएस एनर्जी के माध्यम से ट्रेनिंग दी गई थी। महिलाओं को एलईडी लाइट बनाने का प्रशिक्षण देने का मुख्य उद्देश्य उनकी आय में सुधार करना है। बीडीओ मानस मित्तल ने बताया कि एलईडी बल्ब बनाने के लिए धारचूला के देहात और कालिका के तिदांग में भवन का चयन किया गया है। इसके बाद ग्रोथ सेंटर का निर्माण किया जाएगा। जहां पर महिलाएं एलईडी बल्ब बनाएंगी। एलईडी बल्ब बनाने के लिए दिल्ली से सामान मंगाया जा रहा है।
बाजार से सस्ते दामों में मिलेंगे एलईडी बल्ब
पिथौरागढ़। महिला समूहों की ओर से बनाई गई एलईडी लाइट बाजार से सस्ते दामों में मिलेंगे। बीडीओ मानस मित्तल ने बताया कि एक एलईडी बल्ब को बनाने में 45 रुपये का खर्चा आता है। बाजार में सबसे कम वाट का एलईडी बल्ब 100 रुपये का मिलता है। महिलाओं की ओर से बनाए गए बल्ब 90 रुपये में लोगों को उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके बाद समूह से जुड़ी महिलाएं गांव-गांव जाकर एलईडी बल्ब बेचेंगी।
कालिका तिदांग और धारचूला देहात में महिलाएं एलईडी बल्ब बनाएंगी। एसएचजी से जुड़ीं 30 महिलाओं को प्रशिक्षण दे दिया गया है। देहात में बल्ब बनाने का कार्य शुरू भी हो गया है। भविष्य में दोनों स्थानों पर ग्रोथ सेंटर बनाए जाएंगे। एलईडी बल्ब बनाने का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की आय में सुधार करना है।
- मानस मित्तल, बीडीओ धारचूला।