पिथौरागढ़। वर्दी पहनकर दिल्ली के जंतर-मंतर में छात्रों के प्रदर्शन को समर्थन देने पहुंचे पिथौरागढ़ जिले में तैनात कांस्टेबल शेर सिंह को बर्खास्त किया गया है। एसपी अक्षय प्रह्लाद सिंह ने यह जानकारी देते हुए कहा कि विभाग के खिलाफ गलत आचरण अपनाने और आपराधिक इतिहास को देखते हुए उन्हें बर्खास्त किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, हरिद्वार के रहने वाले पुलिस कांस्टेबल पिथौरागढ़ पुलिस लाइन में तैनात थे। बीते दिनों दिल्ली के जंतर मंतर में हो रहे छात्रों के आंदोलन में पहुंचकर उन्होंने पुलिस विभाग के खिलाफ सवाल उठाए थे। उन्होंने वर्दी में पहुंचकर कहा था कि उत्तराखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर परचून की दुकानों पर मिलते हैं। शेर सिंह यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि दिल्ली में लाठीचार्ज के बाद उनका मन किया कि वह एके-47 उठा लें। इस कारनामे का उन्हें परिणाम भुगतना पड़ा है। एसपी अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने कहा कि अनुशासन, सत्यनिष्ठा एवं सेवा आचरण के मानकों का उल्लंघन करने पर पिथौरागढ़ में तैनात कांस्टेबल शेर सिंह को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि उपलब्ध अभिलेखों, विभागीय जांच एवं प्रासंगिक तथ्यों के परीक्षण के उपरांत यह पाया गया कि शेर सिंह का आचरण उत्तराखंड पुलिस अधिनियम, 2007 के अंतर्गत गंभीर अवचार एवं दुराचार की श्रेणी में आता है जो उत्तराखंड राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली के प्रावधानों का उल्लंघन है। ऐसे में उन्हें नौकरी से बर्खास्त किया गया है।
20 जुलाई से सस्पेंड थे कांस्टेबल
एसपी अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने बताया कि कांस्टेबल शेर सिंह 28 जून से पिथाैरागढ़ से अनुपस्थित थे। इसके लिए उन्हें नोटिस दिया गया था जिसके बाद उन्हें 20 जुलाई को सस्पेंड कर दिया गया था। निलंबित कांस्टेबल का पहले भी आपराधिक इतिहास रहा है। उनका एक अन्य साथी प्रवीण वाल्मिकी जैसे कुख्यात के साथ मिलकर गतिविधियों में संलिप्त था। लोगों को डरा धमकाकर लोगों की जमीन हड़पते थे। हरिद्वार में मामला भी दर्ज किया गया। ये कई महीने जेल भी रहे। इस संबंध में पहले से ही कार्रवाई चल रही थी।