जिला मुख्यालय चंपावत और टनकपुर के बीच चल्थी क्षेत्र में लंबे अर्से से खनन माफियाओं का राज है। कई बार शिकायत के बावजूद प्रशासन ने शिकायत को कभी गंभीरता से नहीं लेता है। झालाकुड़ी गांव के समाजसेवी भैरव सिंह और महेंद्र सिंह ने एक बार फिर जिलाधिकारी को लिखित शिकायत देकर माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई है।
वन विभाग और प्रशासन की अनदेखी से टनकपुर-चंपावत राजमार्ग का चल्थी खनन क्षेत्र माफियाओं के लिए सोने की खान बन गया है। चल्थी खनन क्षेत्र की लोकेशन ऐसी है कि राजमार्ग से खनन क्षेत्र साफ दिखाई पड़ता है, लेकिन आश्चर्य कि राजमार्ग से अक्सर गुजरते प्रशासन के अधिकारियों को माफियाओं की करतूत नजर नहीं आती है। आसपास के ग्रामीण कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन भी कर चुके हैं, मगर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों के मुताबिक खनन से नदी का रुख बदल रहा है, जो आसपास के गांवों के लिए खतरा बनता जा रहा है।
छापे में हो चुका है अवैध खनन का भंडाफोड़
टनकपुर (चंपावत)। गत दिसंबर में प्रशासन की टीम ने चल्थी खनन क्षेत्र में छापा मारकर अवैध खनन के कारोबार का भंडाफोड़ किया था, लेकिन इसके बावजूद अवैध खनन पर अंकुश लगाने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। गौरतलब है कि छापे में प्रशासन की टीम ने 10 स्टाक सीज, एक जेसीबी और ग्रिफ का वाहन सीज किया था।
बंधा निर्माण में अवैध खनिज सामग्री का हो रहा प्रयोग
टनकपुर (चंपावत)। बूम क्षेत्र में सिंचाई विभाग द्वारा कराए जा रहे आरसीसी बंधा निर्माण कार्य में ठेकेदार द्वारा चोरी की खनिज सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। कुछ खनिन माफियाओं द्वारा वन विभाग और प्रशासन से सांठगांठ कर बगैर रायल्टी खनिज सामग्री की आपूर्ति कर वारे-न्यारे किए जा रहे हैं। इस कार्य में करीब 18 से अधिक से शक्तिमान ट्रक लगे हैं। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता आरके यादव का कहना है कि ठेकेदार निर्माण में रायल्टी पैड खनिज सामग्री का उपयोग कर रहा है या नहीं इससे विभाग को कोई लेना-देना नहीं है। उनका कहना है कि निर्माण में प्रयुक्त खनिज सामग्री का विभाग ठेकदार को रायल्टी काटकर भुगतान करता है।